Chapter 196
कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 196
Preview mode only. Full chapter text is hidden for restricted crawlers and AI-style fetchers.
तब देवी किशन की बातें सुनकर सुनीता बोली हां वेदिका बहुत अच्छी है जैसी बहू मुझे मेरे बेटे के लिए चाहिए थी वेदिका बिल्कुल वैसी है । तब यह सुनकर देवी किशन बोला हां तभी तो मेरे विक्रम