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Chapter 89

कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 89

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वही गमले के गने की आवाज सुनकर अपने कमरे में से कल्याणी भागते हुए बाहर आई, तब वेदिका को देखा जो वहां खड़े थर थर कांप पर रही थी । तब वेदिका को वहां खड़े देखकर और जमीन पर टूटे गमले को

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