Chapter 132
कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 132
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वही अपनी आंखों के सामने गौरी को देखकर और उसके बारे में जानकर वेदिका उसके बारे में ही सोच रही थी तरह-तरह के ख्याल उसके दिलों दिमाग में आ रहे थे । वह इसी सोच में डूबी हुई थी तभी पीछे