Chapter 317
कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 317
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तब दरवाजा खटखटाने की आवाज सुनकर सुनीता बोली कौन है आ जाओ अंदर । तब वेदिका ने दरवाजा खोला, तब वेदिका को देखकर सुनीता और देवी किशन दोनों को हैरानी हुई । तब सुनीता बोली बेटा तुम यहां