Chapter 320
कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 320
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तब वेदिका उसकी तरफ देखते हुए उसके कंधे पर हाथ रखकर प्यार से बोली इसमें घबराने की क्या बात है बताओ गौरी तुम्हें पसंद है अजीत । तब गौरी बोली हां भाभी सा, यह कहते हुए चुप हो गई, तब वे