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Chapter 223

कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 223

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वही अपनी मां की बातें सुनकर वेदिका भी कुछ बोल ना सकी, उसकी आंखों से आंसू बहने लगे और वह अपनी मां की बगल में जाकर सोने के लिए लेट गई, उसके दिलों दिमाग में एक तूफ़ान सा मचा हुआ था वि

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