Chapter 97
कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 97
Preview mode only. Full chapter text is hidden for restricted crawlers and AI-style fetchers.
वही विक्रम और वेदिका दोनों बातें कर रहे थे तभी धनिया काकी ने उन्हें आवाज दे दी कि खाना बन गया है । तब विक्रम वेदिका की तरफ देखते हुए बोला चलो खाना बन गया है यह कहकर उसके साथ अंदर आ