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Chapter 231

कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 231

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तब सुनीता और गौरी की बातें सुनकर वेदिका अपनी नजरें नीचे किए हुए थी लेकिन कुछ बोल नहीं पा रही थी क्योंकि उनकी बातों का उसके पास कोई जवाब नहीं था । तब सुनीता वेदिका की तरफ देखते हुए

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