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Chapter 3

कभी सोचते हैं, उन्हें हम भुला दें। - Chapter 3

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सुबह लगभग 4:00 के आसपास वेदिका की नींद खुली तो उसने घबराते हुए टाइम देखा और अपनी हालत देखी जिस हालत में वह विक्रमजीत शेखावत की बाहों में थी । तब यह देखकर वह शर्म के मारे कुछ समझ ही

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