बेपनाह मोहब्बत - Chapter 125
आज कपूर मेंशन बहुत ही खूबसूरती से सजाया गया था क्योंकि आज हमारे तीनों जोड़ों की हल्दी थी और शाम को मेहंदी,,, हल्दी का प्रोग्राम गार्डन में होना था,, पूरे गार्डन को पीले फूलों और पर्दों से बहुत ही खूबसूरती से सजाया गया था,, तीनों जोड़ों के बैठने के लिए बहुत ही अच्छे तरीके से जगह बनाई गई थी,, पहले लड़कों की हल्दी होनी थी फिर उनकी उतरी हुई हल्दी ही लड़कियों को लगनी थी,,, तभी जयराज जी के साथ सभी लड़के वहां आए सभी लड़कों ने पीले कुर्ते और वाइट जीन्स पहनी थी जिसमें तीनों बहुत ही हैंडसम लग रहे थे,, सोनिया जी ने तीनों लड़कों को वहां बिठाया और लड़कियों को बुलाने चली गई,,
वहीं अद्विक के रुम में,, ईशा आज फिर मुंह फुलाकर बैठी हुई थी क्योंकि आज फिर उसके आदि ने उसके पहनने के लिए साड़ी पसन्द की थी और हमारी ईशा को तो साड़ी पहननी आती ही नहीं इसलिए वो अभी बेड पर पड़ी साड़ी तो कभी उसके पास बैठे अद्विक को मुंह बनाते हुए घूर रही थी जो उसे स्माइल करते हुए देख रहा था,, क्योंकि उसे इस समय ईशा पर बहुत प्यार आ रहा था वो लग ही इतनी प्यारी रही थी,, प्रेग्नेंसी की वजह से उसके चेहरे की रंगत और भी बढ़ गई थी और वो थोड़ी हैल्थी भी हो गई जिससे उसके गोरे गोरे गाल गोलू-मोलू से हो गए थे जिन्हें देख हर बार अद्विक का दिल उन्हें खाने को करता पर वो उसकी कंडिशन देख खुद को रोक लेता था,,,
अद्विक उठा उसने पहले रुम का दरवाजा अन्दर से बन्द किया और बॉलकनी का दरवाजा बन्द कर सभी पर्दे गिरा दिया,, फिर उसने बैड पर रखी साड़ी उठाई और ईशा के पास आकर उसका हाथ पकड़ उसे खड़ा किया और धीरे धीरे उसके कपड़े उतारने लगा,, ईशा को बहुत शर्म आ रही थी पर आज कल यह रोज का था अद्विक ईशा को खुद अपने हाथों से ही तैयार करता था,, वो चाहे कितना भी मना कर ले पर वो नहीं मानता था इसलिए ईशा ने भी उसे मना करना छोड़ दिया था,,,
अद्विक उसके कपड़े उससे अलग किए और उसे ब्लाऊज और पेटीकोट पहना दिया फिर वो उसे धीरे धीरे साड़ी पहनाने लगा इस बीच उसके खुद जज़्बात जाग चुके थे पर हमेशा की तरह उसने खुद को कंट्रोल कर लिया क्योंकि वो जानता था कि अभी उसकी शोना की ऐसी हालत नहीं है कि वो उसे झेल सके,,,
उसने ईशा को साड़ी पहनाई जो पीले रंग की थी,, फिर उसने उसके बाल बनाकर उसकी आंखों में काजल और होंठों पर लिपस्टिक लगा दी ,, फिर अद्विक ने उसकी मांग भरी जिसके एहसास से ईशा की आंखें बन्द हो गई,, अद्विक ने उसे देखा वो पूरी तरह तैयार थी ,, पीले रंग की साड़ी में वो बिल्कुल ताजा खिला हुआ फूल लगे रही थी,, अद्विक उसके पीछे खड़ा हो गया और उसे अपनी बाहों में भर उसके कंधे पर सिर रख धीरे से उसके कान में बोला
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