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Chapter 87

बेपनाह मोहब्बत - Chapter 86

लगभग आधे घंटे बाद अद्विक ईशा को लेकर घर पहुंचा, डाक्टर पहले से ही वहां मौजूद थीं, बाकी सब भी वही मौजूद थे, निधि और विधि का रो रोकर बुरा हाल था, ईशा के साथ उन दोनों का रिश्ता अलग सा ही था, कहने को तो ईशा उनकी भाभी और वो दोनों उसकी नन्द थी पर उनमें प्यार बिल्कुल बहनों वाला था,

अल्का जी और दादी जी उन दोनों को शान्त करवा रही थी, अद्विक को देख दोनों उसकी तरफ दौड़ी पर ईशा की हालत देख दोनों और ज्यादा रोने लगी, अद्विक ने सबको इग्नोर किया और ईशा को लेकर अपने रूम की तरफ बढ़ गया, डाक्टर भी उसके साथ ही थी,

अद्विक ने ईशा को आराम से बैठ पर लिटाया और ब्लैंकेट से कवर कर दिया, डाक्टर ने सबको रुम से बाहर जाने के लिए कहा पर अद्विक नहीं माना वो तो बस एकटक नम आंखों से अपनी शोना को देख रहा था जो ना तो कुछ बोल रही थी ना ही कोई हलचल कर रही थी पर उसकी आंखों से आंसू लगातार बह रहे थे,

डाक्टर के बार बार कहने पर अद्विक ना चाहते हुए भी बाहर चला गया, वो वहां से सीधा घर के पीछे वाले हिस्से में चला गया, कुछ पर आसमान को देख खुद को कंट्रोल करता रहा पर जब खुद को सम्भालना मुश्किल हो गया तो वहीं घुटनों के बल बैठ गया और फूट फूटकर रोने लगा,

अपनी शोना की ऐसी हालत उससे देखी नहीं जा रही थी, इन सबका जिम्मेदार वो खुद को मान रहा था कि उसने अपनी शोना का ध्यान नहीं रखा, तभी उसे अपने कंधे पर किसी का स्पर्श महसूस हुआ, उसने चेहरा घुमाकर उस तरफ देखा तो वो जयराज जी थे जो ईशा के बारे में पता चलने पर जल्दी घर आ गए थे,

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