बेपनाह मोहब्बत - Chapter 87
डाक्टर सारी बातें बता कर वहां से चली गई, जिसे सुनकर सब कुछ राहत हुई सब लोग ईशा को देखने अद्विक के रुम में चले गए, पर अद्विक बाहर ही खड़ा रहा, वो कुछ सोच रहा था कुछ तो चल रहा था उसके दिमाग में, उसने अपना फोन निकाला और किसी से बात कर कुछ समझाने लगा, फोन रख चेहरे पर हाथ फिरा उसने गहरी सांस ली और अन्दर की तरफ बढ़ गया, यहां सब लोग ईशा को घेर कर खड़े उससे बातें कर रहे थे और वो बस चुपचाप बेजान सी पड़ी सबको देख रही थी, उसकी आंखें अभी भी नम थी,
अपनी शोना को ऐसे देख अद्विक की आंखें भी नम हो गई पर उसने खुद को सम्भाला और उसकी तरफ बढ़ गया, वो उसके पास बेड पर बैठ गया और उसके बालों को सहलाते हुए बोला
अद्विक:- आप ठीक है शोना,
वहीं अद्विक को देख एक बार फिर ईशा की आंखों से आंसू बहने लगे वो उसके सीने से लगना चाहती थी, उसकी बाहों में सिमट कर रोना चाहती थी पर ड्रग्स की वजह से कुछ बोल भी नहीं पा रही थी बस उसे देखते हुए खामोशी से आंसू बहा रही थी,
अद्विक ने उसके आंसू साफ़ कर ना में गर्दन हिलाई और झुक कर उसका माथा चूम लिया, उन दोनों को देख बाकी सब रुम से चले गए और दरवाजा बंद कर गए, सबके जाते ही अद्विक ने ईशा को कमर से पकड़ ऊपर कर अपने सीने से लगा लिया, उसकी पकड़ ईशा पर काफी मजबूत थी जैसे उसके थोड़ी सी पकड़ ढीली करते ही वो उसे छोड़ कर चली जाएगी,
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