बेपनाह मोहब्बत - Chapter 101
डिनर के बाद सब लोग अपने-अपने रुम में थे क्योंकि सुबह जल्दी सबको वापिस जाना था, दो दिन बाद ईशा और सबका कॉलेज शुरू होने वाला था, और बाकी लड़कों को भी अपना ऑफिस का काम देखना था,
अद्विक ने ईशा की तरफ देखा जो उसकी बाहों में सुकून से सो रही थी, अद्विक ने उसके माथे को चूमा और उसे अच्छे से बिस्तर पर लिटा दिया, वो अपनी जगह से उठा और स्टडी रूम की तरफ बढ़ गया, वो स्टडी रूम की तरफ जा ही रहा था जब उसकी नज़र खिड़की से नीचे गई यहां सानिया नीचे गार्डन में बैठी हुई थी,
अद्विक ने कुछ सोचा और नीचे गार्डन की तरफ बढ़ गया, वो वहां गया और जाकर बिना कुछ कहे उसके पास बैंच पर बैठ गया, सानिया ने उसकी तरफ देखा तो उसे अपने पास बैठा देख एकपल को चौंक गई पर फिर चुपचाप बैठी रही, दोनों खामोशी से बैठे रहे , आज तक दोनों में कभी कोई बात नहीं हुई थी , हां कभी कभी सानिया उससे बात करने की कोशिश करती पर अद्विक या तो उसे इग्नोर कर देता या फिर उस पर गुस्सा कर देता , उसके सानिया के प्रति व्यवहार को लेकर जयराज जी और बाकी सब ने सानिया को हॉस्टल भेज दिया,
दोनों शान्ति से बैठे रहे, कुछ देर बाद अपनी चुप्पी को तोडते हुए अद्विक सामने देखते हुए बोला ,
अद्विक:- जानता हूं आज तक तुम्हारे साथ बहुत बुरा व्यवहार किया है मैंने, जो भी चीजें पास्ट में हुई उन्हें लेकर मेरे मन में एक गुस्सा था, जो जगह मेरी मां की थी वो जगह मिस्टर कपूर ने किसी और को दे दी , यह बात मुझसे बर्दाश्त नहीं हुई, मिस्टर कपूर और उनकी वाइफ को लेकर मेरे मन में जो भी गुस्सा जो नाराज़गी थी वो मैंने हर बार तुम पर निकाली जो ग़लत था, पर क्या करता मां के जाने के बाद बहुत अकेला हो गया था, फिर मिस्टर कपूर ने भी मेरे हिस्से का वक्त और प्यार तुम्हें और तुम्हारी मॉम को दे दिया, इस बात ने मेरे अन्दर के गुस्से को और बढ़ा दिया, पर यकीन मानो मैंने कभी तुमसे नफ़रत नहीं की , मेरे लिए तुम निधि और विधि के जैसे ही थी, पर कभी अपने गुस्से की वजह से मैं यह बात कही जता नहीं पाया,
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