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Chapter 121

बेपनाह मोहब्बत - Chapter 120

अद्विक अपने पिता जयराज जी के सीने से लगा बस रोए जा रहा था,, वहीं इतने सालों बाद अपने बेटे के मुंह से खुद के लिए डैड शब्द सुनकर और उसे अपने सीने से लगा कर जयराज जी को एक सुकून सा मिला पर वही अपने बेटे की ऐसी हालत देख जयराज जी को बहुत दुःख हो रहा था,, उनका बेटा जिसे सब उसके गुस्सैल और सख्त औरे की वजह से जानते हैं वो आज इस कदर रो रहा था अगर कोई बाहर वाला उसे ऐसे देखता तो विश्वास नहीं करता कि यह वही अद्विक कपूर है जिसे सब डैविल कहते हैं,, पर आज वो रो रहा था अपनी शोना के लिए जिसे वो सबसे ज्यादा प्यार करता है जो उसकी जिंदगी है उसके सीने में जो सांसें बन कर धड़कती है,,

जयराज जी ने उसे खुद से अलग किया और उसके आंसू साफ़ करते हुए बोले

जयराज जी:- कुछ नहीं होगा तुम्हारी शोना को,, वो ऐसे तुम्हें छोड़कर कहीं नहीं जाएगी ,, तुम्हारा प्यार उसे कहीं नहीं जाने देगा,, बाकी किसी पर नहीं तो अपने प्यार और भगवान पर भरोसा रखो,,

उनकी बात सुनकर अद्विक कुछ शान्त हुआ,, उसने खुद को सम्भाला और उठकर खड़ा हो गया,, सब उसे ही देख रहे थे,, तभी ओटी का दरवाजा खुला और एक नर्स बाहर आई,, उसे देख अद्विक भागते हुए उसके पास गया और बोला

अद्विक:- मेरी शोना क्या वो ठीक है,, मुझे उससे मिलना है,,

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