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Chapter 19

बेपनाह मोहब्बत - Chapter 18

अगली सुबह

अद्विक की आंखें खुली तो नज़रें सीधे बैड पर गई, पर यह क्या जिसे देखने की चाहत उसकी आंखों को थी वो तो वहां मौजूद ही नहीं थी, अद्विक ने रुम में इधर उधर देखा, फिर बाथरूम भी चैक किया पर वो तो वहां थी ही नहीं, अब  अद्विक को घबराहट होने लगी थी,

अचानक उसके कदम बॉलकनी की तरफ बढ़ गए, पर ईशा उसे वहां भी नहीं मिली, अद्विक की घबराहट बढ़ती जा रही थी क्योंकि ईशा ऐसे सुबह बिना बताए कहीं भी नहीं जाती, अरे वो तो जब तक अद्विक उसे उठाए ना वो उठती भी नहीं है पर आज पता नहीं सुबह सुबह वो कहां चली गई ,

अद्विक नीचे जाने के लिए वापस मुड़ ही रहा था कि उसकी नजर नीचे गार्डन में गई, एकाएक अद्विक के चेहरे पर अब तक जो बेचैनी थी उसकी जगह एक सुकून पसर गया, एक प्यारी सी मुस्कान उसके होंठों पर खिल गई,

ईशा नीचे गार्डन में थी, शक्ति और शेरा भी उसके साथ मौजूद थे जो उसे योगा करवा रहे थे और साथ में एक दूसरे के साथ लड़ भी रहे थे, एक बोल रहा था कि मैं उसे योगा करवाऊंगा तो दूसरा बोल रहा था मैं, और वो बेचारी अपनी मासूम आंखों से टुकूर टुकूर उन दोनों को देख रही थी, और उनकी हरकतों को देख मुस्कुरा रही थी,

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