बेपनाह मोहब्बत - Chapter 67
एक बड़ा सा कमरा यहां बिल्कुल अंधेरा था बस एक छोटा सा बल्ब जल रहा था जिसकी रोशनी पीली थी, उस पीली रोशनी में वहां रखे सोफे पर किसी के होने का आभास हो रहा था, वो इंसान सांस तो दिखाई नहीं दे रहा था पर हां वो थोड़ी सी रोशनी उसकी मौजूदगी जाहिर कर रही थी ,
कुछ टाइम बाद उस इंसान का फोन बजने लगा, उसने नम्बर देखा और फोन रिसीव कर फोन कान पर लगा लिया पर कुछ बोला नहीं, सामने से कुछ कहा गया जिसे सुनकर वो इंसान बोला
इंसान:- उसे जल्द से जल्द मेरे पास लेकर आओ ,
यह बोल उसने बिना आगे वाले की बात सुने फोन रख दिया, उसने अपना सिर पीछे सीट पर टिका लिया और छत को घूरते हुए बोला
इंसान:- बहुत जल्द तुम मेरे पास होगी, फिर होगा अस्ली खेल शुरू, मज़ा आएगा तुम्हारे साथ खेलने में,
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