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Chapter 31

बेपनाह मोहब्बत - Chapter 30

पांच दिन यूंही निकल गए, ईशा भी अब ठीक थी, अद्विक ने इन दिनों उसका बहुत ख्याल रखा था और अलका जी भी उसे मां का प्यार देने में पीछे नहीं थी , उन्होंने ईशा को बिल्कुल अपनी बेटी की तरह ही प्यार दिया था और उसे सम्भाला था, निधि और विधि भी ईशा का बहुत ख्याल रखती थी, वो तीनों एक साथ बिल्कुल बहनों की तरह रहती थी,

दादाजी की तो ईशा फेवरेट हो गई थी, अद्विक से ज्यादा वो ईशा को मानते थे, अतुल जी के लिए भी ईशा और निधि विधि में कोई फर्क नहीं था जैसे उनके लिए निधि और विधि थी वैसे ही ईशा थी, जयराज जी को भी ईशा से कोई परेशानी नहीं थी, हां उनकी कभी ईशा से खुल कर बात नहीं हुई थी पर फिर भी उन्हें ईशा पसन्द थी,

क्योंकि ईशा की वजह से ही उनका बेटा अद्विक अब खुश रहने लगा था, मुस्कुराने लगा था जिसकी वजह सिर्फ और सिर्फ ईशा थी इसलिए अद्विक को खुश देखकर जयराज जी भी खुश थे,

वहीं आकाश ने पिछले पांच दिनों से पूरी कोशिश कर ली थी पर उसे ईशा का पता नहीं चल पा रहा था, ऊपर से उसके बिजनेस को नुक्सान पे नुकसान हो रहा था, जिस वजह से वो झुंझलाया हुआ था,

आज शनिवार था और सोमवार को ईशा और निधि और विधि को कॉलेज जाना था, इसलिए उन लोगों की तैयारियां चल रही थी, अलका जी ने ईशा की जरूरत का सब सामान मंगवा दिया था,‌

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