बेपनाह मोहब्बत - Chapter 121
आधे घंटे बाद अद्विक की गाड़ी एक खंडहर जैसी जगह पर आकर रुकी यहां हर तरफ जंगल ही जंगल था जिसके बीच में एक घर बना हुआ था जो देखने में ही बहुत डरावना लग रहा था,, अद्विक गाड़ी से बाहर निकला और अन्दर की तरफ बढ़ गया,, बाकी सब भी उसके पीछे ही थे,,
अन्दर बहुत सारे गार्ड काले कपड़े पहन कर खड़े थे उनके हाथों में बड़ी बड़ी बंदूकें थी,, वहां पर किसी के चिल्लाने की आवाजें आ रही थी जैसे कोई बहुत तकलीफ़ में हो,, जैसे जैसे वो लोग आगे बढ़ रहे थे वैसे वैसे वो आवाजें तेज होती जा रही थी जो बहुत दर्द भरी थी पर उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा,,
सबसे लास्ट में बने एक रुम के सामने आकर अद्विक रुका तो गार्ड ने उसे देख जल्दी से दरवाजा खोल दिया,, अद्विक अन्दर गया उसके पीछे ही बाकी सब थे,,, अद्विक जैसे ही अन्दर गया वहां पर एक आदमी कुर्सी पर बंधा हुआ था,, उसके चेहरे और शरीर पर बहुत से जख्मों के निशान थे जिन में से खून रिस रहा था,, उस इंसान की हालत बहुत ख़राब थी उसे देख ऐसा लग रहा था जैसे उसे बहुत टोर्चर किया गया हो,,
अद्विक उसके सामने रखी चेयर पर बैठ गया और उसे देखते हुए गुस्से में बोला
अद्विक:- क्या हुआ तकलीफ़ हो रही है,, होनी भी चाहिए तभी तो तुझे पता चलेगा कि जिन मासूम लड़कियों को तो अपने फायदे के लिए बाजार में बेचता है उन्हें कितनी तकलीफ़ होती होगी जब जिस्म के भूखे भेड़िए उन मासूमों को बिना रहम किए नोच खाते हैं,, तुम्हें भी उन सब की तकलीफ़ का पता होना चाहिए,, इन सबके लिए तो शायद मैं तुझे आसान मौत दे भी देता पर आज आज तुमने मेरी शोना को तकलीफ़ देकर अपनी मौत को और भी भयानक बना लिया है,, अब तू देख मैं तेरे साथ क्या करता हूं,, जितना दर्द मेरी शोना को हुआ जब तुमने उन्हें गोली मारी उससे ज्यादा दर्द तुम्हें दूंगा,, जितना खून मेरी जान का बहा है उसका बदला तेरे जिस्म से तेरा पूरा खून निकल कर लूंगा,,,
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