बेपनाह मोहब्बत - Chapter 118
इतने सारे गार्ड्स को देखकर राम हैरान हो गया और थोड़ा घबरा भी गया था पर उसने अपने चेहरे पर नहीं आने दिया और अद्विक को घूरने लगा,, अद्विक ने ईशा को खुद से अलग किया और राम को घूरते हुए उसकी तरफ बढ़ गया,,
ईशा से बात करते समय अब तक उसके चेहरे पर जो सोफट एक्सप्रेशन थे ,, उसकी अब कठोरता और गुस्से ने ले ली थी,, हाथों और माथे की नसें फूल कर दिखाई दे रही थी,, वो राम के घूरते हुए उसके पास से निकल अलका जी के सामने जाकर खड़ा हो गया और उन्हें देखने लगा,, वहीं अलका जी उसे ऐसे अपने सामने खड़ा पाकर डर गई,, पर फिर भी हिम्मत कर खड़ी रही,, तभी अद्विक उन्हें देखते हुए बोला
अद्विक:- क्यों किया आपने ऐसा,, पता है मां के बाद मैंने सबसे ज्यादा प्यार आपको किया ,, क्योंकि मां के बाद एक आप ही थी जिसने मुझे संभाला था पर मुझे नहीं पता था कि वो सब एक दिखावा था असल में तो आप मिस्टर कपूर से बदला लेना चाहती थी,, पर उसमें मेरी मां की क्या ग़लती थी उन्हें क्यों छीन लिया मुझसे,, यहां तक कि मेरे मन में,, मेरे ही पा,,,,, पापा के लिए इतनी नफ़रत भरी दी कि मैंने आज तक कभी उनसे अच्छे से बात नहीं की ,, हमेशा उनके प्यार के लिए तरसता रहा पर मुझमें भरी आपकी इस नफ़रत की वजह से कभी उनके पास नहीं गया,, अरे आपने तो उन्हें भी नहीं छोड़ा जिनका इन सब से कुछ लेना-देना ही नहीं था,,
यह बोल उसने सोनिया जी की तरफ इशारा किया वहीं उसकी बातें सुनकर अलका जी ने अपना चेहरा उससे फेर लिया जैसे उन्होंने जो किया उससे उन्हें कोई फर्क ही ना पड़ा हो,,, अद्विक ने आगे कुछ नहीं कहा क्योंकि उसे भी पता था उसकी बातों से अब कोई फर्क नहीं पड़ने वाला,, उनकी आंखों में नफ़रत के सिवाय और कुछ नहीं था जो अद्विक देख चुका था,, इसलिए उसने कुछ नहीं कहा,, वो राम के सामने आया और उसे घूरते हुए बोला
अद्विक:- तुम्हें क्या लगा था तुम मुझपर नजर रखोगे और मुझे पता नहीं चलेगा,,
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