बेपनाह मोहब्बत - Chapter 117
राम की बातें सुनकर ईशा जो अपनी मां और नाना की मौत की सच्चाई जानकर रो रही थी,, उसकी पूरी बात खत्म होते ही जोर जोर से हंसने लगी ,, उसके ऐसे हंसने पर सब लोग कंफ्यूज हो गए,, वहीं राम भी उसे नासमझी से देख रहा था,, ईशा का हंसना अभी भी जारी था,, कुछ टाइम हंसने के बाद ईशा शान्त हुई और राम को देख कर बोली
ईशा:- बहुत ग़लत किया आपने,, बहुत ग़लत , पहले मेरे मम्मा और नानू को मार दिया आपने और अब मेरे आदि,, पर आपको क्या लगता है कि मेरे आदि को मारना इतना आसान है,,, द अद्विक कपूर है वो जिन्हें सब डैविल कहते हैं,, इतना आसान नहीं है उनको नुकसान पहुंचा पाना,,
इस समय ईशा बहुत सीरियस लग रही थी,, उसकी बातों में यह विश्वास झलक रहा था कि उसका आदि जिन्दा है, ,, सब लोग उसे ही देख रहे थे,, तभी वो बाकी सबकी तरफ देख कर बोली
ईशा:- और आप सब क्यों इस इंसान की बात पर विश्वास कर रहे हैं,, आपको लगता है क्या वो हम सब को छोड़कर जा सकते हैं,,, नहीं वो हमें छोड़कर नहीं जा सकते वो अपनी शोना को छोड़कर कभी नहीं जा सकते,, ( फिर इधर उधर देख चिल्लाते हुए) मुझे पता है आप यहीं कहीं है,, और हम सबको देख रहे हैं,, प्लीज़ सामने आइए ना,, देखिए यह बोल रहे हैं कि इन्होंने आपको,,,, पर मुझे पता है कि आपको कुछ नहीं हुआ है,, आपकी शोना की सांसे चल रही है मतलब आपकी सांसें भी चल रही है,, मैं जिन्दा हूं मतलब आप भी जिन्दा है,, प्लीज़ सामने आइए ना ,,,
यह बोलते बोलते ईशा रोने लगी और वहीं घुटनों के बल जमीन पर बैठ गई,, सब घरवालों की आंखों में उसे ऐसे देख आंसू बह रहे थे,, सब जानते थे कि ईशा और अद्विक एक दूसरे से कितना प्यार करते हैं,,, सब ईशा को रोते हुए देख रहे थे पर किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि उसके पास जाए और उसे चुप करवाए ,, ईशा बहुत बुरी तरह रो रही थी,,
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