बेपनाह मोहब्बत - Chapter 61
सुबह खिड़की से आती धूप ईशा के चेहरे पर पड़ी तो कसमसाते हुए उसने धीरे से अपनी आंखें खोल दी, पर उसके सिर में बहुत तेज दर्द हो रहा था, उसने अपने एक हाथ से अपने सिर को पकड़ लिया, आंखें खोल जब इधर उधर देखा तो खुद को अंजान रुम में देख घबरा गई,
वो जल्दी से उठने लगी तो एक आह के साथ वो फिर बिस्तर पर लेट गई, उसकी कमर और पेट में बहुत तेज दर्द उठा था, उसने नज़रें नीची कर खुद की तरफ देखा तो चौंक गई, इस समय उसके बदन पर एक वाइट शर्ट के बिना और कुछ नहीं था जो कि अद्विक ने उसे पहनाई थी, किसी अनहोनी के डर से ईशा घबरा गई ,
आंखें बंद कर रात के बारे में याद करने लगी तो धीरे धीरे सब याद आ गया, पार्टी में जीत ने जो उसके साथ किया, अद्विक का उसे मारना, फिर ईशा का अद्विक को अपने कपड़े बदलने की जिद्द करना, उन दोनों का एक होना, सब याद आते ही ईशा का चेहरा शर्म से लाल हो गया,
पर तभी वो नजरें इधर उधर दौड़ा कर अद्विक को ढूंढने लगी, उसने बाथरूम के दरवाजे की तरफ देखा जो बाहर से बन्द था इसका मतलब अद्विक बाथरूम में भी नहीं था, अद्विक को अपने पास ना पाकर ईशा की आंखें नम हो गई, उसके शरीर में बहुत दर्द हो रहा था, वो चाहती थी कि इस समय अद्विक उसके पास हो, क्योंकि खुद को अंजान कमरे में देख उसका दिल घबरा रहा था,
किसी तरह दर्द को बर्दाश्त कर वो बैड से उठी पर दो कदम चलने पर ही वो लड़खड़ा कर गिर गई और उसके मुंह से आह निकल गई , अद्विक जो जिम से अभी अभी वापिस रुम में आ रहा था, उसने जब ईशा की आह सुनी और उसे जमीन पर गिरे देखा तो भागते हुए उसके पास आया, उसे अपनी गोद में उठाते हुए बोला
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