सफेद इश्क ❤️❤️ - Chapter 93
कुछ दिन और ऐसे ही निकल गए अब आस्था की delivey में बस दस दिन बचे थे ,, आज रूद्र की एक जरूरी मीटिंग थी ,, वो जाना तो नहीं चाहता था पर उसका जाना बहुत जरूरी था, आस्था को उसका बाहर जाना अच्छा नहीं लग रहा था ,, उसे कुछ बुरा होने का अंदेशा हो रहा था , पर वो रूद्र को दिखा नहीं रही थी ,, वो नहीं चाहती थी कि रूद्र परेशान हो वैसे भी आज कल वो उसकी वजह से काफी परेशान रहता है ,, अच्छा तो रूद्र को भी नहीं लग रहा था पर उसका जाना भी जरूरी था ,, उसने प्यार से आस्था का माथा चूमा और रोमा और दादी को उसका ख्याल रखने का बोला वहां से चला गया ,, चाची जी और चाचा जी कही बाहर गए हुए थे वो लोग शाम को आने वाले थे ,,
दोपहर का समय आस्था , रोमा और दादी डाइनिंग टेबल पर बैठी हुई थी ,, तभी एक सर्वेंट आई और उन्हें लंच सर्वे करने लगी ,, आस्था ने उस सर्वेंट को देखा जो कुछ 21 - 22 साल की थी ,, चेहरे पर घूँघट लिया हुआ था ,, आस्था उसे देखते हुए बोली ,,
आस्था :- यह कौन है ,,
दादी :- बेटा यह झुमरी है राजू की मासी की बेटी है ,,दो दिन पहले राजू को किसी काम से गाँव जाना पड़ा इसलिए उसने अपनी जगह इसे भेजा है ,,
आस्था ने हाँ में गर्दन हिला दी ,, झुमरी ने दादी और रोमा को लंच सर्वे किया और फिर आस्था को सर्वे करने लगी , पर आस्था खाना देते टाइम उसके हाथ कांप रहे थे चेहरे पर पसीना आ रहा था ,, आस्था को खाना देकर वो साइड हो गई ,, हलकी हलकी बातों के बीच तीनो खाना खाने लगी ,, कुछ देर में उनका खाना हुआ तो झुमरी बरतन लेकर जल्दी से किचन में चली गई ,, उसने इधर उधर देखा और फिर अपना फ़ोन निकल किसी को फ़ोन मिलाने लगी ,, कुछ ही देर में सामने वाले ने फ़ोन उठाया तो झुमरी बोली ,,
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