सफेद इश्क ❤️❤️ - Chapter 25
सबके जाने के बाद आस्था भी नाश्ता गर्म करने किचन में चली गई,, रुद्र उससे बात करना चाहता था पर कुछ नहीं बोला और जाकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गया,, आस्था ने नाश्ता गर्म किया और राजू की मदद से डाइनिंग टेबल पर लगा दिया,, रुद्र उसे ही देख रहा था जो उसके लिए चुपचाप नाश्ता सर्व कर रही थी,,
फिलहाल रुद्र ने कुछ नहीं कहा और चुपचाप अपना नाश्ता करने लगा,, पहला बाइट खाते ही उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ गई,, दरअसल आस्था ने दहीं के साथ आलू के परांठे बनाए थे जो रुद्र को बहुत पसन्द थे,, अपने पापा के साथ अक्सर वो ऐसी ऐसा नाश्ता खाता था,, उसे ऐसा चटपटा और तीखा खाना पसन्द था इसलिए अक्सर उसके पापा उसके लिए ऐसा नाश्ता बनाते थे पर अपने पापा के जाने के बाद उसने यह सब खाना बन्द कर दिया था साथ ही तीखा खाना भी छोड़ दिया था,, पर आस्था के कारण वो फिर से ऐसा खाना खा रहा था,,
उसने आस्था की तरफ देखा जो चुपचाप अपना नाश्ता कर रही थी,, रुद्र बहुत ध्यान से उसे देख रहा था,, उसकी मासूमियत उसके चेहरे और उसकी आंखों में साफ देखी जा सकती थी,, कोई कैसे इस लड़की को तकलीफ़ दे सकता है,, कितना कुछ सहा है उसने,,, पहले अपने खुद के पापा और सौतेली मां का व्यवहार और फिर शादी के एक हफ्ते बाद ही पति की मौत ,, इतने दर्द के बाद भी सबको चैन नहीं मिला कि पति के मरने का दोषी भी सबने उसे मान लिया,, और तब से अब तक वो अपने ससुराल वालों के ताने सुनती आ रही है,, यह तो अच्छा हुआ कि उस दिन रुद्र वहां आ गया वरना पता नहीं उस दिन उस बेचारी के साथ क्या हो जाता,, रुद्र ने अब ठान लिया था कि इस खूबसूरत और मासूम सी दिखने वाली लड़की को जो अब उसकी बीवी है उसे हमेशा खुश रखेगा और उसे हर वो खुशी देगा जिसकी वो हकदार हैं और जिससे वो आज तक वंचित रहीं है,,,
रुद्र यही सब सोच रहा था और एकटक आस्था को देख रहा था,, तभी आस्था की नजर उस पर गई तो उसने देखा कि रुद्र बिना पलक झपकाए एकटक उसे ही देख रहा है,, उसकी प्लेट में नाश्ता वैसे ही पड़ा था,, यह देख आस्था बोली
आस्था:- क्या हुआ आपको नाश्ता पसन्द नहीं आया,,
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