सफेद इश्क ❤️❤️ - Chapter 83
"रुक जाइये हम नहीं मानते इसे अपन हुकुम सा"
सबने आवाज की दिशा में देखा तो भानुप्रताप राजवंशी के साथ साथ मथुरी जी और उनके पति राजवीर राजवंशी और महिमा चल कर उनकी तरफ ही आ रहे थे ,, जहाँ अंजना जी दादी सा उन्हें गुस्से में देख रही थी वही शिवांश और प्रदीप जी के चेहरे पर उन्हें देख कोई भाव नहीं था ,, भानु प्रताप जी आकर शिवांश के सामने खड़े हो गए और बोले
भानु प्रताप :- कुंवर शिवांश हुकुम सा नहीं बन सकते ,,,
राज्प्रोहित जी :- पर क्यूँ राजवंशी साहब ,, कुंवर शिवांश हुकुम सा क्यूँ नहीं बन सकते,,,
उनकी बात सुनकर राज्प्रोहित जी बोले तो भानु प्रताप जी शिवांश को घूरते हुए ही बोले
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