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Chapter 7

सफेद इश्क ❤️❤️ - Chapter 7

आरती जी आस्था को खींचते हुए घर से बाहर लेकर जा रही थी, वो सब लोग घर से बाहर गार्डन में आ चुके थे यहां अभी कुछ देर पहले मीना की शादी हुई थी, रुद्र जो यह सब देख गुस्से में भर चुका था, वो जल्दी से मंड़प की तरफ गया यहां अभी भी अग्नि कुंड में अग्नि जल रही थी, उसने उस अग्नि के सामने रखी थाली में से मुट्ठी भर सिंदूर उठाया और सबके पास आकर किसी के कुछ समझने से पहले ही वो सिन्दूर आस्था की मांग में भर दिया,

सब लोग यहां थे वहीं रुक गए, सबके चेहरों पर हैरानगी के भाव थे, आरती जी के हाथ से आस्था का हाथ छूट गया जब उन्होंने उसकी मांग में सिंदूर देखा, वहीं आस्था भी बुत बनी खड़ी रुद्र को देख रही थी जो अभी भी गुस्से में आरती जी की तरफ देख रहा था, वहीं प्रवीण जो वहीं खड़ा सब देख रहा था वो भी यह देखकर हैरान रह‌ गया कि उसका बॉस जो लड़कियों से नफ़रत करता है उसने आज एक लड़की की इज्जत उसके मान‌ सम्मान के लिए बिना सोचे समझे उससे शादी कर ली, पर वो खुश था अपने बॉस के लिए, रूद्र ने आस्था का हाथ पकड़ कर अपने पास किया और आरती जी को देख कर बोला,

रुद्र:- आपको यह तकलीफ़ थी ना कि यह किसी मर्द के साथ एक कमरे थी, तो लो अब मैं कहता हूं कि यह मेरे साथ एक कमरे में थी, और एक पत्नी अपने पति के साथ एक कमरे हो इस बात से किसी को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए,

सब लोग अभी भी बुत बने खड़े आस्था को देख रहे थे, जिसका पूरे सिर से लेकर उसके माथे और नाक पर भी सिन्दूर गिरा हुआ था जो इस बात का गवाह था कि वो अब एक सुहागन है, रुद्र की सुहागन,

रुद्र ने उसका हाथ पकड़ा और लेकर मंडप की तरफ बढ़ गया , आस्था तो ब उसके साथ खिंचती चली जा रही थी वो अभी भी हैरान सी रुद्र को देख रही थी,

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