सफेद इश्क ❤️❤️ - Chapter 43
लीविंग रुम में दादी और चाची के पास बैठी वसुंधरा जी आस्था के बारे में कुछ ना कुछ उल्टा बोले जा रही थी,,
वसुंधरा जी:- मुझे तो शुरू से ही वो लड़की पसन्द नहीं थी ,, ज़रूर उसी ने प्राग को बहकाया होगा वरना मेरा भतीजा ऐसा बिल्कुल नहीं है पता नहीं रुद्र ने उसमें क्या देख लिया जो उससे शादी कर ली ,, कितनी लड़कियां उससे शादी करने को तैयार थी जो बड़े से बड़े और रहीस खानदान की थी पर नहीं रुद्र ने बिना किसी को बताए इस लड़की से शादी कर ली,,
वो ऐसे ही आस्था के बारे में कुछ ना कुछ बोले जा रही थी जब दादी जी उसे देख गुस्से में बोली
दादी जी:- बस करो तुम चुप हो जाओ,, तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा कि तुम्हारे भतीजे ने क्या किया है ,, उसने हमारे घर में हमारे घर की इज्जत पर हाथ डालने की कोशिश की है,, वो बच्ची इस समय पता नहीं केसी हालत में होगी,, हमें तो डर लग रहा कि रुद्र पता नहीं अब क्या करेंगे,, इतने समय बाद आस्था के रुप में हमारे पोते की जिन्दगी में खुशियां आईं हैं आपके और आपके भतीजे की वजह से कहीं उनकी उधर खुशियों को नजर ना लगे जाए,,,
यह बोल दादी चुप कर गई और उदास होकर ऊपर रुद्र के रुम की तरफ देखने लगी,, चाची भी उनके साथ ही थी उनके चेहरे पर भी परेशानी साफ देखी जा सकती थी,, वहीं वसुंधरा जी अपनी सास की बात सुनकर चुप कर गई और घूर उन्हें देखने लगी,, वो उन्हें देखते हुए मन में बोली
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