सफेद इश्क ❤️❤️ - Chapter 79
माधुरी जी की बात सुनकर आस्था उनकी तरफ देखने लगी,, वो उन्हें पहचानने की कोशिश कर रही थी,, तभी माधुरी जी उसके पास आई और उसके सामने बैठते हुए बोली
माधुरी जी:- जानते हैं आप हम नही पहचानती ,, पर हम आपको अच्छे से पहचानते हैं आखिर हमारे भाई सा और हमारी भाभी सा की परछाई है आप बिल्कुल उनकी तरह ही दिखती है आप,, सच कहें आज आपको देखकर ऐसा लग रहा है जैसे स्वयं भाभी सा हमारे सामने बैठी है,, बस आपकी आंखें भाभी सा जैसी नहीं बल्कि भाई सा जैसी है बाकी आप बिल्कुल भाभी सा पर गई है,, हम जानते हैं बेटा आपको हमारी बातों पर विश्वास नहीं होगा भी कैसे क्योंकि आप तो कुछ जानती ही नहीं है,, क्योंकि तो तभी महज छह महीने की थी पर हम सब जानते हैं,, कैसे हमारे भाई सा और भाभी सा को मार दिया गया और आपको हम सब से दूर कर दिया गया,, हमारे अपनों ने ही हमारी पीठ पीछे छुरा घोप दिया सिर्फ और सिर्फ दौलत के लिए,, पर हम उन सबको ऐसे ही नहीं छोड़ेंगे,, आप हमारा साथ नहीं देना चाहती तो कोई बात नहीं पर हम हमारे भाई सा और भाभी सा की मौत का बदला लेकर रहेंगे,, और उससे पहले आपको कुछ दिखाना चाहते हैं अगर उसे देखने के बाद भी आप हमारा साथ नहीं देना चाहती तो हम कुछ नहीं कहेंगे,, आपको वापिस मुम्बई जिन्हें आप अपना पति कह रही है उनके पास पहुंचा देंगे,,, आइए हमारे साथ,,
यह बोल वो उठ गई और रुम के बाहर जाने लगी,, आस्था भी माधुरी जी को देखते हुए उठकर खड़ी हो गई और उनके साथ जाने लगी हालांकि उसके दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था जो सिर्फ वही जानती थी,, पर उसने फिलहाल कुछ नहीं कहा और चुपचाप माधुरी जी के पीछे पीछे चलने लगी,,
माधुरी जी उसे लेकर एक कमरे में आई और दीवार पर लगी एक बड़ी सी तस्वीर के सामने खड़ी हो गई,, आस्था भी उनके पास आकर उस तस्वीर के सामने खड़ी हो गई और उस तस्वीर को देखने लगी,, जिसमें एक आदमी जो बहुत शानदार पर्सनेलिटी का मालिक था जिनके चेहरे पर एक अलग सी तेज और रौब दिखाई दे रहा था जो कोई और नहीं राजस्थान के पूर्व राजा रघुवेन्द्र सूर्यवंशी थे और उनके साथ ही उनकी पत्नी रानी मालती सूर्यवंशी थी,, उनके चेहरे की चमक भी कुछ अलग ही थी ,, आंखों में एक अलग सा तेज था,, आस्था गौर से उस फोटो को देख रही थी,, उसकी आंखें हल्की नम हो चुकी थी वो देख पा रही थी कि वो बिल्कुल अपनी मां सा जैसी ही दिखती है बस उसकी आंखें अपने बाबा सा जैसी है,, वो एकटक उसे फोटो को देख रही थी,,
तभी माधुरी जी उसे देखते हुए बोली
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