सफेद इश्क ❤️❤️ - Chapter 26
रुद्र और आस्था सिंह मेंशन पहुंचे और अन्दर की तरफ बढ़ गए,, दादी और मालती जी वहीं दरवाजे पर खड़ी उनका इंतजार कर रही थी,, उन्होंने उन दोनों को दरवाजे पर ही रोक दिया,, दादी ने पहले उन दोनों की आरती की और फिर चावल से भरा क्लश दरवाजे की चौखट पर रख आस्था को देख बोली
दादी:- अब इस चावल के कलश को अपनी दाहिने पांवों से गिराओ बेटा,,
आस्था ने बिल्कुल वैसा ही किया,, फिर दादी ने सर्वेंट को आवाज दी और आलते की थाल लाने के लिए कहा,, तभी वसुंधरा जी हाथों में बड़ी सी थाल लेकर उनके पास आई और बोली
वसुंधरा जी:- वैसे तो मैं अपने बेटे के लिए अपने पसन्द की बहु लाना चाहती थी,, पर मेरे बेटे ने तुमसे शादी कर ली ,, इसलिए मैं भी अब से तुम्हें अपनी बहु के रुप में स्वीकार करती हूं,, भले ही मेरा बेटा मुझसे नाराज़ हैं पर एक मां होने के नाते मुझे उसकी खुशियों की परवाह है,, इसलिए तुम्हें बस इतना ही कहूंगी मेरे बेटे को हमेशा खुश रखना,,
उनकी बात सुनकर रुद्र उन्हें कुछ कहने को हुआ पर आस्था ने उसका हाथ पकड़ लिया,, रुद्र ने उसकी तरफ देखा तो उसने ना में गर्दन हिला कर उसे शान्त रहने के लिए कहा,, आस्था की बात मानकर रुद्र चुप हो गया,, पर उन दोनों की यह इशारेबाजी देख वसुंधरा जी का चेहरा गुस्से से काला पड़ गया पर वो भी शान्त ही रही,,
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