सफेद इश्क ❤️❤️ - Chapter 89
शाम के पांच बजे आस्था की आँख खुली ,, उसने अपनी पलके झपकते हुए इधर उधर देखा पर उसे रूद्र कही नजर नहीं आया ,, तभी रूम का दरवाजा खुला और रूद्र अंदर आया उसके हाथ में ट्रे थी ,, आस्था को जगा देख वो मुस्कुराते हुए बोला ,,
रूद्र :- उठ गई आप ,, चलिए अब जल्दी से फ्रेश हो जाइये और कुछ खा लीजिये अपने नाश्ते के बाद कुछ भी नहीं खाया ,, ऐसी हालत में आपका भूखे रहना सही नहीं ,,
यह बोल वो ट्रे सोफे के सामने टेबल पर रख आस्था के पास चला गया जो उठने की कोशिश कर रही थी ,, पर बड़ा पेट होने की वजह से बेचारी से उठा नहीं जा रहा था ,, रूद्र ने उसे सहारा देकर उठाया और फिर उसका हाथ पकड़ उसे बाथरूम में ले गया ,, उसे फ्रेश करवाने के बाद रूद्र ने उसे लाकर आराम से सोफे पर बिठा दिया और खुद उसके पास बैठ उसे फ्रूट्स खिलने लगा ,, आस्था ने भी आराम से उसके हाथ से फ्रूट्स खाए और फिर उसके साथ निचे आ गई ,, जहाँ ऋतिक और रोमा सोफे पर बैठे हुए थे ,, ऋतिक अपने होमवर्क कर रहा था और रोमा उसकी मदद कर रही थी ,, रूद्र ने उसे आराम से सोफे पर बिठाया और उसके गाल को प्यार से सहलाते हुए बोला
रूद्र :- कुछ भी चहिये हो मुझे आवाज दे देना मैं स्टडी रूम में हूँ ,, हम्म
आस्था ने मुस्कुराते हुए में गर्दन हिलाई तो रूद्र प्यार से उसका माथा चूम रोमा को उसका ख्याल रखने का बोला वहां से अपने स्टडी रूम में चला गया ,, वही आस्था ऋतिक को देखने लगी जो ध्यान से अपना होम वर्क कर रहा था ,,, कुछ देर बाद रोमा ऋतिक का होमवर्क करवा कर आस्था को लेकर बाहर गार्डन में चली गई ,, और उसका हाथ पकड़ कर धीरे धीरे उसे वाक करवाने लगी ,, ठंडी ठंडी हारी घास पर नंगे पर चल कर आस्था को बहुत अच्छा लग रहा था ,, आजकल उसके पैरो में काफी दर्द रहने लगा था पर ऐसे नंगे पैर घास पर चलने से उसे काफी सुकून मिलता था इसलिए वो रोज शाम को कुछ देर ऐसे नंगे पैर घास पर जरुर चलती थी ,, रोमा और वो बातें करते हुए टहल रही थी ,, पर रोमा देख सकती थी आज आस्था कुछ चुप चुप और उदास सी थी ,, यह देख रोमा उसे देखते बोली
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