सफेद इश्क ❤️❤️ - Chapter 81
सब जानकर प्रदीप जी को बहुत बुरा लगा वहीं शिवांश का चेहरा गुस्से से लाल हो गया,, उसकी बहन जो एक राजकुमारी थी उसने कितना कुछ झेला और कितनी दर्द भरी जिंदगी जी है और वो अपनी बहन के लिए कुछ नहीं कर पाया यही सोच उसे गुस्सा आ रहा था,, प्रदीप जी को भी यह जानकर बहुत दुःख हो रहा था और गुस्सा भी आ रहा था वो अपने भाई सा की आखिरी निशानी को ढूंढ नहीं पाए ,,, वो लोग बातें कर ही रहे थे जब कमरे से आस्था के चिल्लाने की आवाज आई,, उसकी आवाज सुनकर तीनों जल्दी से भाग कर कमरे की तरफ चले गए,,,
रुद्र जल्दी से रुम में आया तो देखा कि आस्था बहुत पैनिक कर रही थी,, अंजना जी और गौरी उसे संभालने की कोशिश कर रही थी पर वो उन दोनों से शान्त ही नहीं हो रही थी,, रुद्र जल्दी से उसके पास आया जिसे देख अंजना जी और गौरी उससे दूर हो गई,, रुद्र जल्दी से उसके पास बैठा और उसे अपने सीने से लगा लिया और उसके बालों को सहलाते हुए बोला
रुद्र:- शान्त हो जाइए जान, देखिए हम यही है आपके पास,,
रुद्र की आवाज सुनकर आस्था धीरे धीरे शान्त होने लगी उसने खुद को पूरी तरह रुद्र के सीने में छुपा लिया,, रूद्र ने भी उसे पूरी तरह अपनी बाहों में समेट लिया और उसके बालों को सहलाते हुए उसे शान्त करवाने लगा,,
दरअसल आस्था को जब होश आया तो खुद के एक बार फिर अंजान लोगों को देख वो डर गई,, उसे लगा वो एक बार फिर रुद्र से दूर हो गई यही सोच वो पैनिक करने लगी और चिल्लाते हुए रुदर को बुलाने लगी,, सब उन दोनों को ही देख रहे थे,, बेशक आस्था ने बचपन से लेकर बहुत कुछ सहा था जिसका सबको बहुत दुःख था पर उसकी जिंदगी में उसे इतना प्यार करने वाला हमसफ़र मिला था यह जानकार सब खुश भी थे,, शिवांश ने सबको बाहर चलने के लिए कहा तो सब उन दोनों को अकेला छोड़ बाहर आ गए,,
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