सफेद इश्क ❤️❤️ - Chapter 40
रुद्र को गए दो दिन हो चुके थे,, आस्था सबके सामने तो खुश रहती पर उसकी आंखों की उदासी दादी और चाची साफ देख पा रही थी,, कुछ ही दिनों में उसे रुद्र की आदत लग चुकी थी,, वैसे भी जिस इंसान को बचपन से किसी का प्यार ना मिला हो उसे अगर कोई थोड़ा सा भी प्यार दे या उसकी थोड़ी सी केयर करें तो उसके लिए बहुत होता है , ऐसा ही आस्था के साथ हो रहा था,, जिस तरह से रुद्र उसका ख्याल रखता है उसकी हर छोटी से बड़ी बात का ध्यान रखता है और उसे इतना प्यार करता है इसलिए आस्था को रुद्र की याद आ रही थी,, ऐसा नहीं था कि बाकी सब उसका ख्याल नहीं रखा रहे थे दादी और चाची उसका बहुत ख्याल रखते हैं पर फिर भी उसे रुद्र की कमी खल रही थी,, कहीं न कहीं आस्था को इस बात का भी एहसास हो गया था कि उसके मन में रुद्र के लिए कुछ फीलिंग्स है जिसे शायद वो अब समझ भी गई थी,,
वहीं कुछ ऐसा ही हाल रुद्र का भी था,, उसे भी अब आस्था की आदत लग चुकी थी,, जिस वजह से उसका कम में बिल्कुल मन नहीं लग रहा था,, पर उसे कैसे भी कर इस काम को पूरा करना था और जिस काम के लिए वो आया था उसे भी किसी हाल में उसे पूरा करना ही होगा,,
शाम का समय सिंह मेंशन
दादी, चाची और वसुंधरा जी के साथ आस्था बैठी बातें कर रही थी,, बातें तो दादी और चाची ही कर रही थी आस्था के साथ वसुंधरा जी तो बस वैसे ही वहां बैठी हुई थी,, तभी दो लोग घर के अन्दर आए उन्हें देख वसुंधरा जी खुश होते हुए उठकर उनकी तरफ बढ़ गई वहीं उस इंसान को देख दादी और चाची का मुंह बन गया ,, पर उन्होंने कुछ नहीं कहा वहीं आस्था तो अजनबियों की तरह उन्हें देख रही थी,,
वसुंधरा जी उस इंसान के पास गई और बोली
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