सफेद इश्क ❤️❤️ - Chapter 47
कुछ दिन ऐसे ही निकल गए,, इन दिनों में रुद्र और आस्था का रिश्ता और भी मजबूत हो चुका था,, उस दिन के बाद दोनों फिर दुबारा इंटीमेट नहीं हुए थे पर दोनों की रात एक दूसरे की बांहों में गुज़रती और सुबह भी एक दूसरे की बांहों में ही होती,, दोनों के दिलों में एक दूसरे के लिए प्यार बढ़ता ही जा रहा था,, यहां रुद्र हर बार आस्था से अपने प्यार का इजहार कर देता वहीं आस्था बस मुस्कुरा कर रह जाती पर कभी बोलती नहीं कि वो भी रुद्र से प्यार करती है,, वहीं रुद्र उसके मुंह से सुनना चाहता था कि वो भी उससे प्यार करती है,, ऐसा नहीं था कि आस्था को रुद्र से प्यार नहीं था बस उसे कहने में शर्म आती थी,, वो अगर कहने की कोशिश भी करती तो भी रुद्र के सामने वो कुछ बोल ही नहीं पाती थी ,, पर आज रुद्र ने ठान लिया था कि वो आस्था से उसके मन की बात जानकर ही रहेगा इसलिए वो आज सुबह आस्था से नाराज़ हो कर गया था,, हालांकि यह नाराजगी झूठी मूठी थी सिर्फ आस्था के मुंह से उसका इजहार सुनने के लिए पर आस्था रुद्र को नाराज़ होकर जाता देख सच में परेशान हो गई थी,,,
इस समय वो अपने रुम में इधर से उधर चक्कर काटते हुए यही सोच रही थी कि वो रुद्र को कैसे मनाएं,, वो खुद में ही बड़बड़ाते हुए बोला रही थी,,
आस्था:- आस्था तू ऐसा कैसे कर सकती हैं,, रुद्र जी तेरा इतना ख्याल रखते हैं तुझसे इतना प्यार करते हैं और तू तू सिर्फ उनसे सिर्फ इतना नहीं कह पाई कि तू भी उनसे प्यार करती है,, यही यहीं तो चाहते हैं वो कि तुम भी उनसे अपने प्यार का इजहार करे,, इसमें गलत क्या है तू भी तो उनसे प्यार करती है तो फिर बोल क्यों नहीं देती,,, पर मैं क्या करूं मुझे उनसे बहुत शर्म आती है,, ,,, पर अब तेरी शर्म के चक्कर में वो नाराज़ होकर चले गए नाश्ता भी नहीं किया उन्होंने,, अब मैं क्या करूं
वो खुद से ही सवाल कर खुद को ही जवाब दे रही थी,, इस समय उसका चेहरा उतरा हुआ था उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे जिससे रुद्र मान जाए हालांकि यह सिम्पल था उसे सिर्फ रुद्र को आई लव यू कहना था पर फिर भी वो इस समय काफी परेशान थी ,, तभी उसके चेहरे पर एक चमक आ गई और वो खुश होते हुए खुद से ही बोली
आस्था:- हां यह ठीक है मैं यह कर सकती हूं,, इससे रुद्र जी खुश हो जाएंगे और मैं फिर उनसे अपने दिल की बात भी बोल दूंगी,,
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