सफेद इश्क ❤️❤️ - Chapter 88
खैर दिन बीत रहे थे ,देखते ही देखते चार महीने गुजर गए आस्था को सातवा महीना लग चूका था ,, पर जुड़वाँ बच्चे होने की वजह से उसका पेट काफी बढ़ चूका था जिस वजह से उसे उठने और बैठने में बहुत तकलीफ होती थी , रूद्र आस्था का बहुत अच्छे से ख्याल रख रहा था ,, उसने अपना पूरा काम घर पर ही शिफ्ट कर लिया था ,, वो आस्था को एक मिनट के लिए भी अकेले नहीं छोड़ना चाहता था , इसलिए ऑफिस का सारा काम वो घर से ही कर रहा था, ,,, अगर कभी उसे किसी इमरजेंसी मीटिंग के लिए जाना भी पड़ता तो वो रोमा को आस्था के पास छोड़ कर जाता ,, रोमा उसका बहुत अच्छे से ख्याल रखती ,,, आस्था के मूड स्विंग्स से लेकर उसकी मॉर्निंग सिकनेस वो सब प्यार से हैंडल कर लेता था ,, आस्था भी बस उससे ही शांत होती थी ,, आज कल उसकी तकलीफ बढ़ चुकी थी ,, उसकी कमर और पैरों में काफी दर्द रहने लगा था ऊपर से वो बिना मदद के उठ बैठ नहीं सकती थी ,, जिस वजह से उसे काफी परेशानी होती थी कई बार तो वो रो देती थी पर रूद्र अपने प्यार से उसे सम्भाल लेता था
रात का समय रूद्र आस्था को बाहों में भरे बैठा था ,, आस्था उसकी उसकी गोद में बैठी हुई थी ,, रूद्र का एक हाथ उसके पेट पर था जिससे वो धीरे धीरे उसके पेट को सहला रहा था वही दुसरे हाथ से उसने उसे अपनी बाहों में भर रखा था ,, तभी अचानक आस्था के मूंह से एक सरप्राइजिंगली आह निकली ,, और होंठों पर एक लम्बी सी मुस्कान आ गई ,, वही रूद्र जिसका हाथ आस्था के पेट पर था वो भी हैरानी और ख़ुशी के मिले जुले भाव से उसे देखने लगा ,, अभी अभी उसने जो महसूस किया था वो बहुत हैरान और खुश करने वाला था ,, तभी एक बार फिर उसने वही फील किया ,, वो खुश होते चेह्कते हुए बोला

रूद्र :- जान,, जान बेबी ने kick किया ,,
आस्था ने हाँ में गर्दन हिलाई तो रूद्र चिला उठा ,, उसे बहुत ख़ुशी हो रही थी ,, अपने बच्चे को महसूस कर वो बता नहीं सकता था के वो कितना खुश है ,, उसने जल्दी आस्था को अपनी तरफ घुमाया और उसके होंठों को कस कर चूम लिया और फिर उसके पेट को भी चूम लिया ,, उसने आस्था के पेट को सहलाया और अपने बच्चों को महसूस करते हुए बोला
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