हां इश्क़ है मुझे भी - Chapter 48
ईशानी किचन के गेट तक पहुंच गई थी और सामने से एक मेड को लापरवाही से बाहर आते देख ईशानी जैसे ही साइड होकर एक कदम पीछे लेती है तो पीछे किसी से टकरा जाती है.....!! टकराते ही ईशानी हड़बड़ा जाती हैं और हड़बड़ाकर जैसे ही आगे बढ़ती है तो आगे मेड से टकरा जाती उससे पहले ही आहान ईशानी को कंधे से पकड़ कर अपनी तरफ खींच लेता है....!!
मेड तुरंत संभलते हुए पीछे हट जाती है तो आहान उसे इशारे से निकलने के लिए बोलता है तो मेड जोकि सरस्वती जी के लिए फ्रूट जूस लेकर जा रही थी तुरंत अपनी ट्रे को संभालते हुए तेजी से आगे बढ़ जाती है।
वही मेड के हटते ही आहान झुक कर धीरे से ईशानी के कान में बोलता है ,,,,,,,, रुक क्यों गई कंटिन्यू करो......!!
ईशानी : सारी दुनिया आपको चोर नजर आती है लेकिन आप खुद चोरी चोरी बातें सुनते हैं.....!!
आहान : ओ हेलो ये मेरा घर है और मैं कभी भी कहीं भी घूम सकता हूं.....!! वैसे इरादा तो नहीं था...!! उठा तो फोन करने के लिए था लेकिन फिर.............
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