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Chapter 39

हां इश्क़ है मुझे भी - Chapter 39

इतने दिनों में तुम्हें बहुत अच्छे से जान गई हूं और तुम्हारी बहन को उस दिन सड़क पर देख कर तुम्हारे साथ वो हरकत करने पर जान लिया था , जब तुम उसे बचा रही थी और उसने जानबूझकर तुम्हें धक्का दिया था! जो इतनी छोटी उम्र में इतनी दुष्ट थी वो बड़े होकर सुधरी नहीं होगी इसका अनुमान  यहां तुम्हें अपने परिवार से अलग देखकर सहज ही लगा सकती हूं.....!! दुनिया देखी है मैंने !  बूढ़ी आंखें उम्र के साथ धुंधला जरूर जाती हैं लेकिन ये आंखें वो देख लेती है जो जवान आंखें नहीं देख पाती.....!! इतना बोलकर सरस्वती जी ईशानी की कलाई छोड़ देती है और ईशानी दौड़ते हुए वहां से चली जाती है।

थोड़ी देर में ईशानी तैयार होकर कॉलेज जाने के लिए निकलने लगती है तो सरस्वती जी उसे आवाज देकर नाश्ता करके जाने के लिए बोलती है तो ईशानी सरस्वती जी से नज़रें चुराकर धीरे से बोलती है,,,,, दादी मां देर हो रही है मैं कैंटीन में........

सरस्वती जी : (घड़ी की तरफ देखकर ईशानी की बात बीच में ही काटते हुए) अभी तो आधा घंटा है रोज तो तुम इस टाइम नही जाती ...!!और रात किसी ने कहा था कि आज सुबह वो कॉलेज नहीं जाने वाली है या फिर एक लेक्चर छोड़ देगी ताकि मेरी नर्स से बात कर सके...!! बस ऐसे ही दिखावे का प्यार है...!! रात गई बात गई.....!! देर से जाना तो छोड़ो तुम तो आज जल्दी जा रही हो....!!ठीक है मत नाश्ता करके जाओ मैं भी पूरी बदपरहेजी करूंगा...!! कहते हैं बूढ़े बच्चे एक समान होते हैं जब तुम बाहर का उल्टा सीधा खाओगी तो ये बूढ़ी भी खा लेगी ...!!

ईशानी : वो दादी मां आज जरूरी लेक्चर है मैं शाम को जल्दी आ जाऊंगी तो...........

सरस्वती जी : भाग रही हो....?? घबराओ मत ....!! जिस बात का जिक्र करने में तुम्हें परेशानी है उस बारे में कोई सवाल नहीं करूंगी मैं....!! और ये भी मत सोचना कि तुम्हें जज करूंगी! दुनिया देखी है मैंने जितना तुम्हें जानती हूं उसके बाद तुम्हारे पास्ट का जिक्र छेड़कर तुम्हारे जख्मों को हरा नहीं करना चाहती ! इंसान अपने जख्म तभी छुपाता है और अपने पास्ट के जिक्र तक से भागता है जब उनका जिक्र आपको खून के आंसू रुला दे...!! बैठो नाश्ता कर लो, 5 मिनट लगेंगे....!! मेरी तसल्ली के लिए ही कर लो...!! मुझे माफ कर दो बेटा अगर मुझे पता होता कि मेरा बोलना तुम्हारे जख्मों को हरा कर देगा तो मैं वो सब भी नहीं बोलती ....!!

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