हां इश्क़ है मुझे भी - Chapter 46
आहान की पकड़ जो पहले ही ईशानी की बाहों से ईशानी की बातें सुनकर ढीली पड़ चुकी थी वही ईशानी की आखिरी लाइन सुनकर आहान के हाथ खुद ब खुद नीचे हो जाते हैं और इसी एक पल में ईशानी आहान को धक्का देकर रोते हुए भाग जाती है....!!
आहान भाव शून्य सा ईशानी को वहां से जाते हुए देखता रह जाता है.....!!
ईशानी की बातें सुनकर आहान को एक बार फिर खुद पर गुस्सा आता है और वो काफी देर अपने गुस्से को अपने अंदर जज्ब करता रहता है और जब नाकाम हो जाता है तो दीवार पर अपना मुक्का देकर मारता है और धीरे से बड़बड़ाता है,,,,,,,, क्यों....??आखिर क्यों .....?? इतना बोलकर एक गहरी दर्द भरी रेखा आहान के चेहरे पर उभर आती है.....!! न जाने क्या था जो आहान को तकलीफ दे रहा था.....?? जो दर्द इस वक्त आहान के चेहरे पर था वो सिर्फ ईशानी की बातों का असर था या वजह कुछ और भी थी......??
आहान कुछ देर ऐसे ही खड़ा रहता है और फिर तेज कदमों से सरस्वती जी के रूम की तरफ बढ़ता है दरअसल सरस्वती जी के इस घर में दो रूम थे एक नीचे जिसमें आहान सरस्वती जी को पहले ढूंढने गया था और एक ऊपर जब सरस्वती जी के जोड़ों में दर्द महसूस होता था तो वो नीचे वाले रूम में ही रहना पसंद करती थी वरना तो ऊपर के फ्लोर पर रहना उन्हें ज्यादा भाता था वहां से बालकनी में बैठकर गार्डन का व्यू लेना उन्हें बहुत पसंद था....!! और आहान उस रूम की तरफ बढ़ता है। कुछ देर सरस्वती जी जो कि सुकून से सो रही थी को देखकर अपने रूम की तरफ बढ़ जाता है लेकिन जैसे ही एक रूम के सामने से गुजरता है तो ईशानी की सिसकियां आहान के कान में पड़ती हैं और ईशानी के रूम के सामने आहान के कदम ठहर जाते हैं......!! रूम लॉक्ड नहीं था हल्का सा खुला था।
कुछ पल आहान आगे बढ़े या अंदर जाए वाली सिचुएशन में रूम के बाहर खड़ा रहता है और फिर जैसे ही आहान रूम के अंदर जाने का डिसाइड करके अपना हाथ रूम का दरवाजा खोलने के लिए बढ़ाता है तभी ईशानी की नजर रोते-रोते दरवाजे पर पड़ती है और आहान को अपने रूम के बाहर खड़ा देख ईशानी अपने आंसू पोंछते हुए तेजी से खड़ी होती है और जोर से अपने रूम का दरवाजा लगातें हुए बोलती है ,,,,, इतने इंटेलिजेंट हैं कि सबका दिमाग पढ़ लेते हैं फिर भी इन आंसुओं के झांसे में आ गए....?? ये भी एक तरीका है मेरे जैसे लड़कियों का आपके जैसे अमीर लड़कों को फंसाने का.....!! और इतना बोलकर ईशानी दरवाजा बंद करके उससे पीठ लगाकर रोते हुए धीरे-धीरे नीचे बैठ जाती हैं....!!
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