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Chapter 45

हां इश्क़ है मुझे भी - Chapter 45

इससे पहले की ईशानी खुद को संभाल कर आहान के इस कदर हिकारत भरी नजरों से देखने और उसी हिकारत से खुद से दूर धकेलने पर बिखरे अपने वजूद को समेट कर कुछ भी प्रतिक्रिया दे पाती आहान अपने घुटनों को थोड़ा सा मोड़ते हुए झुकता है और फर्श पर बैठी हुई ईशानी के चेहरे के नजदीक अपने चेहरे को झुकाते हुए बोलता है ,,,,,,,,, हू द हेल आर यू....?? कर क्या रही हो तुम मेरे घर में.…...??

ईशानी अपने आंसुओं को पीकर धीरे से बोलती है,,,,मैं दादी मां.......

ये सुनते ही आहान ईशानी को बीच में ही टोंकते हुए बोलता है ,,,,,,,होल्ड ऑन.....!! क्या बोला तुमने ....??दादी मां......?? लिसन वो मेरी दादी मां है ....!! कुछ दिन के लिए घर से क्या गया तुम तो बड़ी फास्ट निकली इतनी जल्दी रिश्ते जोड़कर बैठ गई....!! कहां से उठाकर लाइ दादी मां तुम्हें.....?? चिड़ियाघर बना रखा है इस घर को कोई दो आंसू क्या टपका दे किसी को भी उठकर घर में ले आती हैं.....!! और इधर कहां सीढ़ियों पर चढ़कर आ रही थी....?? नौकरों के लिए अलग क्वार्टर बने हुए हैं ना......!! लेकिन लगता है दादी मां दादी मां बोलकर अपने लिए एक रूम भी ले लिया है....!! नजरें यही तक है या लंबी सोच रखी है....?? कही रिश्ते जोड़ने ........ फिर कुछ सोचते हुए बोलता है,,,,,,,, तभी मैं कहूं दादी मां इस बार इतनी जिद पर कैसे आ गई ....??कहीं इस सब के पीछे भी तुम ही तो नहीं।कहीं ऐसा तो नहीं है कि इस घर को अपना परमानेंट एड्रेस बनाने के चक्कर ..........

आहान लगातार बोले जा रहा था और ईशानी सुने जा रही थी लेकिन अब ईशानी की बर्दाश्त से बाहर हो गया था....!! आहान के शब्द ईशानी की बर्दाश्त और सहनशीलता के बाहर चले जाते हैं और ईशानी तेजी से घूम कर आहान के दोनों कंधों पर अपने दोनों हाथ रखकर उसे पीछे धकेल देती है ! आहान इसके लिए तैयार नहीं था और पीछे की तरफ गिर पड़ता है.....!! आहान को संभालने का मौका दिए बिना ईशानी तेजी से खड़ी होती है और बोलती है,,,,,,,,, कोई शौक नहीं है मुझे रिश्ते जोड़ने का और आपसे तो बिल्कुल भी नहीं है....!!ये गलतफहमी अपने दिमाग से निकाल दीजिए.....!! समझ में नहीं आता किस गुरुर में जीते हैं आप.....?? रिश्ते बनाने का शौक होता तो आपके साथ प्यार से पेश आती। जब देखो इस घमंड में रहते हैं कि जैसे पूरी दुनिया में आप ही एक लड़के हैं और पूरी दुनिया की लड़कियां आप ही के पीछे पागल है....!! कोई और काम नहीं है बस आपके करीब आने के बहाने ढूंढती हैं....!! गिर रही थी तो गिरने देते मैंने नहीं कहा था खुद को बचाने के लिए....!! बल्कि गिर जाने दिया होता तो अच्छा होता! वहां से गिरकर सिर्फ शरीर पर जख्म लगता लेकिन नहीं शब्दों से सामने वाले की आत्मा को छलनी करने में महारत हासिल है आपको....!! वहां से बचाया ही इसलिए था ताकि अपने इस अवगुण  जिसे कि आप बहुत बड़ा गुण समझते होंगे , का प्रदर्शन करने का मौका हाथ से ना निकल जाए....!!

आहान खड़े होकर अपने हाथ झाड़ते हुए बेहद तंज भरे अंदाज में बोलता है,,,,,, उफ्फ...!! इतना तेवर....?? तुम्हें क्या लगता है दो-चार फिल्मी डायलॉग मरोगी और मैं इंप्रेस हो जाऊंगा तो सॉरी ! इंप्रेस नहीं हुआ मैं ....!!थोड़ा और बोलो ना जैसे ,,,,,मैं उस टाइप की लड़की नहीं हूं....!! लगता है आपको मेरे जैसी कोई मिली नहीं.....!! मैं बहुत शरीफ हूं....!! मेरी मजबूरी यहां ले आई.....!!ब्ला ...ब्ला...ब्ला

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