Welcome back, Story Creator!

Keep writing amazing stories. Your readers are waiting, Creator.

Chapter 38

हां इश्क़ है मुझे भी - Chapter 38

प्लीज दादी मां लापरवाही मत कीजिए......!! मैं सीरियसली बोल रही हूं कोई धमकी नहीं दे रही हूं अगर आप मनमानी करेंगी तो मैं ये जाॅब भी और कॉलेज पर सब छोड़ कर चली जाऊंगी .......!!इतना बोलते हुए ईशानी सरस्वती जी के हाथ पर अपना हाथ रखती है तो सरस्वती जी की हथेली को छूते ही चौंक कर बोलती है ,,,,,,, दादी मां आपको तो बहुत तेज बुखार है......!!

ईशानी सरस्वती जी को जबरदस्ती थोड़ा सा खिलाकर दवाई देती है और फिर आज रात अपने रूम में ना सो कर सरस्वती जी के रूम में ही उनके बेड के पास चेयर डालकर बैठ जाती है और उनके माथे पर ठंडे पानी की पट्टियां रखती है क्योंकि बुखार बहुत तेज था.....!!

एक डेढ़ घंटे बाद जब बुखार की इंटेंसिटी कम होती है तो सरस्वती जी ईशानी को अपने रूम में जाकर सो जाने के लिए बोलती हैं तो ईशानी ये कहकर मना कर देती है कि मुझे अभी नींद नहीं आ रही है और थोड़ी पढ़ाई भी करनी है दरअसल सरस्वती जी ने वाॅमिटिंग भी कर दी थी इसलिए ईशानी अभी वहीं रुक कर उनकी हालत को वॉच करना चाहती थी और इसलिए अपनी एक बुक लेकर पढ़ने बैठ जाती है।

सरस्वती जी को नींद आ जाती है फिर बीच में सरस्वती जी की आंख खुलती है तो वो जिद्द करके ईशानी को अपने बेड पर बैठकर पढ़ने के लिए बोल देती हैं.....!!

सुबह 5:00 बजे सरस्वती जी की आंख खुलती है तो ईशानी बेड के क्राउन से कमर लगाए अधलेटी सी सो रही होती हैं....!! गर्दन एक साइड को लुढ़की हुई थी....!! ईशानी पढ़ते पढ़ते ही सो गई थी सरस्वती जी धीरे से ईशानी का चश्मा उतारकर रख देती है और ईशानी के हाथ में थामी हुई बुक भी बंद करके एक तरफ रख देती है उस समय ईशानी हल्का सा कुनमुनाती है लेकिन जागती नहीं है....!! शायद थोड़ी देर पहले ही उसकी आंखें लगी थी....!!

This chapter is locked

Unlock this chapter with 5 diamonds to continue reading.

Your balance: 0 diamonds
Buy Diamonds
38 / 49
Storymania AI Ready with page context
Context Open the assistant from any page to use that page as context.
AI

Tell me what you are writing. I can help with ideas, outlines, grammar, plot, pacing, and summaries.