हां इश्क़ है मुझे भी - (लैब)Chapter 9
ईशानी खिड़की से बाहर आसमान की तरफ अपना सिर उठाकर मन ही मन में बोलती है,,,,,क्यों हर बार मै ही सारे रिश्ते हार जाती हूं......?? कहां गलत होती हूं मैं, जो हर बार गुनहगार बना दी जाती हूं......?? मॉम, डैड का प्यार अविका को ही मिला......!! यहां तक की दोस्तों की भीड़ भी अविका के पास है....!! फिर भी कोई शिकायत नहीं थी मुझे क्योंकि सुना था कि बेशक एक ही सही लेकिन अगर एक सच्चा दोस्त आपके पास हो तो आपसे खुशकिस्मत कोई नहीं है....!! राहुल से मिलने के बाद खुद को खुश किस्मत समझने लगी थी लेकिन वो भी आज...........
दो ही रिश्ते तो थे मेरे पास में.....!! सबने हमेशा गलत समझा लेकिन नानू और राहुल ये दोनों फिर भी मुझसे प्यार करते थे लेकिन आज राहुल ने भी......... ऐसा गिराया की खुद की नजरों में भी गिरा हुआ महसूस कर रही हूं......!! कैसे सामना करूंगी नानू का ....??नहीं वहां नहीं जा सकती मैं.....!! अपनी बेगुनाही का एक ही तो सबूत था मेरे पास राहुल , उसने भी मुंह मोड़ लिया.....!!
क्यों अविका क्यों किया तुमने मेरे साथ ऐसा .......?? कुछ भी तो नहीं था मेरे पास ........!!सब छीन लिया मुझसे.....!! मैंने क्या बिगाड़ा था तुम्हारा सब कुछ तो था तुम्हारे पास खूबसूरत चेहरा , मॉम डैड का अटूट विश्वास नानू नानी का प्यार और ढेर सारे दोस्त.....!!
मैंने हमेशा तुम्हें अपनी बहन मान कर प्यार किया ....!! उस दिन जो कुछ देखा जो कुछ किया वो मेरी गलती थी.....?? क्या गलत किया था उस दिन मैंने....?? उस दिन भी तो तुम्हारी मदद ही की थी....!! नहीं जानती थी कि तुम्हारी मदद नहीं बल्कि तुम्हारी नफरत को और हवा दे रही हूं।
इसी के साथ ईशानी 10 दिन पहले की घटना को याद करने लगती है......!!
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