Welcome back, Story Creator!

Keep writing amazing stories. Your readers are waiting, Creator.

Chapter 15

हां इश्क़ है मुझे भी -(गलती का एहसास) Chapter 15

इधर ईशानी को अटेंडेंट को बर्फ लगाते देख अविका जो बुरी तरह से चिढ़ी हुई थी और गुस्सा भी बहुत आ रहा था लेकिन फिर भी खुद को कंट्रोल करते हुए बोलती हैं

अविका :क्या यार ईशानी अब क्या बर्फ भी तू ही लेकर बैठेगी उसके हाथ में दे दे वो खुद लगा लेगा थोड़ा सा ही तो लगा है.....! अभी डॉक्टर बनी नहीं है जो अभी से क्लीनिक खोल कर बैठ गई.....!! तेरी ड्रिंक भी गरम हो रही है

ईशानी: कैसी बात कर रही है अक्कू.....?? मेडिकल की पढ़ाई तू भी कर रही है इलाज कैसे करना है ये सीखने से पहले इंसानियत सीखना जरूरी है....!! ड्रिंक से ज्यादा जरूरी काम मै कर रही हूं....!! इन्हें हमारी गलती की वजह से चोट लगी है.....!! उस कंडीशन में इनकी मदद करना हमारा फर्ज बनता है और अगर नहीं भी लगी होती तो भी मैं ऐसा नहीं कर सकती....!! किसी का बहता  खून इस पानी से ज्यादा कीमती है ! हो जाने दे गरम ईशानी थोड़ी नाराजगी के साथ बोलती है.....!!

अविका : नाराज क्यों हो रही है....?? मैं तो बस इसलिए कह रही थी कि तेरा पता ही नहीं चलता कब क्या चाहती है.....??कभी चीज वेस्ट करने पर लेक्चर आता है और कभी वेस्ट होने में  कोई प्रोब्लम नहीं मैं तो बस इसलिए बोल रही थी कि ये खराब .........

ईशानी : गरम ही हो जाएगा मैं पी लूंगी वेस्ट नहीं जाएगा....!! ईशानी लापरवाही से बोलकर फिर बड़े प्यार से काउंटर पर ही मौजूद दूसरे अटेंडेंट से बोलती है ,,,,,,,भैया जरा मेरे क्लच का लॉक खोल दीजिए तो .....!!एक हाथ से खुलेगा नहीं....!!

This chapter is locked

Unlock this chapter with 5 diamonds to continue reading.

Your balance: 0 diamonds
Buy Diamonds
15 / 49
Storymania AI Ready with page context
Context Open the assistant from any page to use that page as context.
AI

Tell me what you are writing. I can help with ideas, outlines, grammar, plot, pacing, and summaries.