हां इश्क़ है मुझे भी - Chapter 47
आहान के बोलने पर सरस्वती जी की नजर ईशानी पर पड़ती है और वो एकदम से बोलती हैं,,,,,,,, अरे ईशानी....!! आज इतनी सुबह-सुबह कहां जा रही हो.....?? अभी तो 7 ही बजे हैं और तुम तो बेटा 7:30 बजे जाती हो.....!!
ईशानी : वो दा........ लेकिन फिर आहान की बात याद आते ही ईशानी दादी मां के संबोधन से बचते हुए बोलती है,,,,दा ....दरअसल वो मुझे लाइब्रेरी में कुछ काम था तो..........
लाइब्रेरी का जो काम है वो बाद में निपटा लेना....!! फिलहाल तुम कहीं नहीं जा रही हो !एक तो नाश्ता नहीं किया है ऊपर से मुझे तुम्हें किसी से मिलवाना भी है.....!! जल्दी से इधर आओ....!! अपने पोते के वापस आने की खुशी में सरस्वती जी उत्साहित होकर बोलती हैं तो ईशानी एक फीकी सी मुस्कुराहट अपने होठों पर सजाकर सुस्त कदमों से सरस्वती जी की तरफ बढ़ती है और इस दरमियान एक बार भी नजर उठाकर नहीं देखती , देखती तो सामने आहान पर नज़र पड़ती जिसे उसने पहले ही देख लिया था.....!!सरस्वती जी बेहद उत्साह से बोलती हैं ,,,,, ईशू ये है मेरा पोता अन ........इतना बोलते ही आहान की नजरें सरस्वती जी के चेहरे पर जाती है तो सरस्वती जी तुरंत अपनी जीभ अपने दांतो के नीचे दबाते हुए बोलती हैं,,,,,,,, मेरा मतलब है आहान.....!!! बताया था ना मैंने तुम्हें........?? सरस्वती जी आहान की नजरों के सवाल से अपनी नज़रें चुराकर उम्मीद भरी नजरों से ईशानी की तरफ देखती हैं कि वो उनकी हां में हां मिला दे लेकिन ईशानी तो जैसे वहा थी ही नहीं वो तो इसी उधेड़बुन में थी कि जल्दी से कैसे वहां से निकले इसलिए सरस्वती जी के कुछ शब्द उसके कानों में पड़ते हैं और कुछ नहीं....!! और इसीलिए ईशानी की तरफ से जवाब अभी भी कुछ नहीं आता तो सरस्वती जी एक नजर अहान की तरफ देखती हैं जो अभी भी सरस्वती जी को ही घूर रहा था.....!!
अब सरस्वती जी हल्की घबराहट के साथ अपने गले को साफ करते हुए थोड़ा जोर से बोलती हैं,,,,,,,,,, ईशानी मैंने बताया था ना मेरे पोते आहान के बारे में सरस्वती जी के इस तरह जोर से बोलने पर पहली बार ईशानी ने अपनी पलकों को उठाया था लेकिन बहुत थोड़ा सा और पूरा फोकस सरस्वती जी पर ही था। इस वक्त भी उसने आहान की तरफ देखना गवारा नहीं समझा था.....!!
ईशानी के सरस्वती जी की तरफ देखते ही सरस्वती जी तिरछी नजर से आहान को देखती हैं जबकि इस वक्त आहान की नजरे पूरी तरह ईशानी पर थी! ईशानी का यूं उसकी तरफ नजर उठा कर ना देखना कहीं ना कहीं आहान को चुभ रहा था....!!
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