हां इश्क़ है मुझे भी - Chapter 29
आहान फुटेज में मौजूद ईशानी पर फोकस करता है लेकिन ईशानी की नीली गहरी आंखों के अलावा कुछ नहीं देख पाता है ....!!क्योंकि चोर के ईशानी के चेहरे पर बैग मारने की वजह से ईशानी के चेहरे पर भी कट लगा था तो जख्म और गर्मी के चलते ईशानी ने पूरा चेहरा दुपट्टे से कवर किया हुआ था....!!
और जब आहान की नजर ईशानी के चेहरे पर लिपटे दुपट्टे पर जाती है तो अहान की आंखें बड़ी-बड़ी हो जाती है.....!! नीचे लिफ्ट के पास आहान जिस लड़की से टकराया था उसने भी तो अपना चेहरा कवर किया हुआ था....!! हालांकि ईशान ने एक बार भी उसे टकराने वालीलड़की की तरफ नहीं देखा था लेकिन क्योंकि उसके दुपट्टे में आहान का ब्रेसलेट उलझा था और उसे निकालते हुए एक नजर आहान ने उस दुपट्टे पर डाली थी....!!
अहाना जल्दी से लिफ्ट और लिफ्ट के पास की फुटेज चेक करता है तो सब कुछ देखने के बाद आहान अपनी आंखें गुस्से में कस के बंद कर लेता है,,,,,,, क्या कुछ नहीं सुना दिया था हमने उस लड़की को ....!! उसकी चप्पल टूटी थी....!! सच में ये एक एक्सीडेंट ही था.....!! वो जबर्दस्ती गाले नहीं पड़ रही थी...!! इतना बड़ा एहसान करके गई थी और बदले में थैंक यू तो बहुत दूर की बात है ना जाने कितना कुछ सुना दिया था.....!! ये सब सोच कर आहान को खुद पर गुस्सा आ रहा था.....!!
आहान अपनी दो उंगलियां अपने माथे पर घिसते हुए बुदबुदाता है,,,,,,, आजकल के टाइम में ऐसा कौन करता है .....?? आयुष की बताई कहानी पर गौर करते हुए आहान का खुद पर गुस्सा और बढ़ जाता है और वो स्क्रीन पर नजर जमाते हुए बोलता है ,,,,,,,वो अच्छे से जानती थी कि इस बैग में हीरे हैं!इतने कीमती हीरे लौटा दिए और ना अपना नाम बताया ना हीं चेहरा दिखाया, क्यूं.....?? ऊपर से मैने इतना कुछ सुना दिया तब भी एक शब्द नहीं बोली.....!! क्या सच में कोई इतना अच्छा, इतना मासूम हो सकता है.....?? कहीं कोई मकसद तो नहीं उसका ....?? ये मैं क्या सोच रहा हूं नहीं-नहीं अगर कोई मकसद होता तो अपनी पहचान ऐसे छुपाती नहीं.....!! लोग छोटा सा एहसान करके जताने लग जाते हैं उसने तो ऐसा कुछ भी नहीं किया.....!!
सोचते सोचते आहान अब ईशानी के चेहरे को देखने की कोशिश में ईशानी के चेहरे को फोकस करता है लेकिन ईशानी की गहरी नीली आंखों के अलावा कुछ नजर नहीं आता......!! एक अलग सी कशिश थी उन आंखों में......!! ठीक वैसे ही जैसे............ बोलते हुए आहान न जाने क्या सोचते हुए ईशानी की नीली गहरी आंखों में डूब सा जाता है(जी हां आज ईशानी की गहरी नीली आंखें साफ-साफ नजर आ रही थी चश्मा जो नहीं था उन पर) और अहान को होश तब आता है जब उसके फोन की बेल बजती है....!!
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