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Chapter 17

हां इश्क़ है मुझे भी - (जज़्बा)Chapter 17

खिड़की खोलते ही सोहम जोर से चिल्लाता है,,,,,,, सालों हंसना बंद करो भाग रही है वो...!! पकड़ो....!!

जैसे ही खिड़की से कूदने के लिए खिड़की के ऊपर अपना पैर रखती है तभी सोहन और उसके दोस्त दौड़कर ईशानी को पकड़ लेते हैं ईशानी खिड़की से बाहर कूदती इससे पहले वो लोग उसे खिड़की से वापस पीछे खींच लेते हैं....!!

सोहम और सोहन के दो दोस्तों ने मिलकर ईशानी को पीछे खींच लिया था जबकि सोहन के तीसरे दोस्त ने जल्दी से आगे बढ़कर खिड़की को बंद करके वापस चटकनी लगा दी थी....!!

सोहम के दो दोस्तों ने अब ईशानी के दोनों हाथ पकड़े हुए थे जबकि सोहम ईशानी की तरफ बढ़ते हुए बोलता है,,,,,,,,, नशे का असर नहीं हुआ तुझ पर....?? लगता है इसका कहना सही है कि किसी भी नशे से ज्यादा नशीली है .....!! ऐसा सच में है क्या .....?? अब तो करीब से देखना ही पड़ेगा  कितना नशा है तुझ में ....??बोलते हुए सोहम जैसे ही ईशानी की तरफ बढ़ता है तो ईशानी सोहम के पेट में अपना घुटना देकर मारती है.....!!

सोहम बुरी तरह से दर्द से छटपटा जाता है और अपना पेट पकड़कर घुटनों पर बैठ जाता है और फिर गुस्से से चीख कर बोलता है,,,,,,,,,, वो हाल करो साली का कि किसी लड़के को देख हाथ पैर चलाना तो बहुत दूर की बात है सांस लेना भी भूल जाए......!!

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