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Chapter 8

हां इश्क़ है मुझे भी -(ईशानी ने छोड़ा घर) Chapter 8

वो लड़की अब तो नाम पता है ना ईशानी एक बार फिर अपनी भर आई आंखों को साफ करके धीरे से अपना बैग उठाती है और एक बार फिर अपनी बहन और बेस्ट फ्रेंड को देखती हैं और फिर अपना सिर झटक कर बिना आहट किये वहां से खामोशी से निकल जाती है......!!

गेट के पास पहुंचकर ईशानी के कदम ठहर जाते हैं लेकिन आज शायद उसकी किस्मत में इस घर में रुकना नहीं लिखा था जैसे कहा जाता है कि दाने-दाने पर खाने वाले का नाम लिखा होता है वैसे ही हर जगह की भी शायद अपनी व्यवस्थाएं हैं जैसे ईश्वर ने लिखा है कौन कब तक इस दुनिया में रहेगा कब जाएगा इसी तरह किसके भाग्य में कहां का दाना पानी कहां की छत लिखी है ये भी निश्चित होता है तभी तो गार्ड गेट पर मौजूद नहीं था शायद नेचर की कॉल अटेंड करने निकल गया था ! और ईशानी बड़े आराम से खामोशी के साथ बाहर निकल जाती है! बाहर आकर उस महल जैसे आलीशान घर को मुड़कर एक नजर देखती है और तेजी से सड़क पर उसके कदम बढ़ने लगते हैं। सड़क पर चलते हुए मुश्किल से 10 मिनट ही गुजरे थे कि तभी एक गाड़ी का हार्न सुनाई देता है ईशानी एक साइड होती है और लिफ्ट के लिए उसका हाथ उठाने ही लगती है कि तभी उसके कानों में एक आवाज गूंजती है,,,,,,,,, "उस काम के लिए तो तू भी बुरी नहीं है" इस आवाज के साथ ईशानी बुरी तरह सहम जाती है! ना सिर्फ सहम जाती है बल्कि चेहरे का रंग भी ऐसे उड़ जाता है जैसे उसने कोई मौत से भी भयानक मंजर देख लिया हो......!!

हालांकि ईशानी ने अपना हाथ कार रोकने के लिए नहीं दिया था फिर भी कार उसके पास में आकर रुक जाती है। बिना रोके यूं सुनसान सड़क पर कार के रुकने से ईशानी की धड़कनें बढ़ जाती है ,लेकिन फिर कार में से एक औरत अपना चेहरा बाहर निकाल कर बोलती है,,,,,,,,, बेटा कहीं छोड़ दूं क्या......??

घबराहट ईशानी पर इतनी हावी थी कि उसके शब्द नहीं निकल रहे थे लेकिन उस औरत को देखकर थोड़ी राहत की सांस लेते हुए लड़खड़ाती जुबान में हां नहीं बोल पाती और मुंह से निकल जाता है ,,,,,ना ....!!नहीं मैं चली जाऊंगी......!!

अंजान औरत :इस सुनसान सड़क पर इस तरह तुम्हारा अकेले जाना सेफ नहीं है! आ जाओ मैं छोड़ दूंगी....!! बात भी सही थी और उस औरत ने इतने प्रेम भाव से कहा था कि ईशानी तुरंत आगे बढ़कर बिना कुछ बोले कार पर बैठ जाती है.....!!

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