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Chapter 40

हां इश्क़ है मुझे भी - Chapter 40

ईशानी को हंसते-हंसते एकदम से  मायूस होते देख सरस्वती जी खिलखिला कर हंस पड़ती है और बोलती हैं,,,,,,,,, अभी से क्यों घबरा रही हो .....??मेरे सामने  कुछ भी कहो .....!!उसके सामने अगर अनु बोल दिया तो शिव जी का तीसरा नेत्र खुल जाएगा और फिर अपने साथ-साथ तुम मेरी भी क्लास लगवा दोगी.....!

क्या इतने डेंजरस है अनु जी....?? दादी मां आप..... आप डरती हैं....?? जबकि नाम सुनके मेरी तो हंसी निकल रही है.....!! बोलकर एक बार फिर से ईशानी शुरू की लाइन बोलते हुए मुंह दबाकर और फिर आखरी लाइन पर खिल खिलाकर हंस पड़ती है।

ईशानी को यूं हंसते देखा सरस्वती जी के चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है और तभी सरस्वती जी का फोन बज उठता है।

स्क्रीन पर अनु लिखा देखा सरस्वती जी के मुस्कान और गहरी हो जाती है तो सरस्वती जी की स्माइल देखकर ईशानी झट से हंसते हुए बोलती है,,,,,,,,, लगता है आपकी पोती आई मीन पोते का फोन आ गया है....!!

बदले में सरस्वती जी मुस्कुराते हुए एक हाथ से फोन उठा कर दूसरे हाथ की उंगली ईशानी को दिखाते हुए उसे अपने होठों पर  रखते हुए ऐसे इशारा करती है जैसे बोल रही हो खामोश हो जा शैतान लड़की....!!

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