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Chapter 28

हां इश्क़ है मुझे भी - Chapter 28

आहान : आ रहा हूं.....!!नीचे ही हूं....!! बोलते हुए आहान लिफ्ट का बटन प्रेस करने के लिए जैसे ही अपनी उंगली आगे बढ़ाता है ठीक तभी लिफ्ट का दरवाजा खुलता है और  ईशानी जैसे ही लिफ्ट से निकलने के लिए अपने कदम बढ़ाते हैं तो ईशानी की चप्पल का सोल टूट जाता है और ईशानी का बैलेंस बिगड़ जाता है और वो सीधा आहान के ऊपर जाकर गिरती है टक्कर इतनी तेज थी कि निशानी का माता आहान के सीने पर जाकर रखता है और अगले ही पल ईशानी पीछे की तरफ गिरने लगती है लेकिन ना चाहते हुए भी आहान का हाथ खुद ब खुद ईशानी की कमर पर चला जाता है....!!

ईशानी की आंखें घबराहट में बंद हो जाते हैं लेकिन जब उसे एहसास होता है कि वह गिरी नहीं है किसी ने उसे थाम लिया है परेशानी धीरे से अपनी आंखें खोलती हो तो सामने बेहद हैंडसम लड़के को देख उसकी भूरी लेकिन गहराई ली हुई आंखों में डूबने से खुद को रोक नहीं पाती...!! अजीब सी कशिश थी उन आंखों में.....!! वही आहान जो फोन पर बात कर रहा था और इशानी को बचाने के चक्कर में उसका फोन गिर गया था और क्योंकि उसका ध्यान पूरी तरह अपने फोन पर था पूरी तरह से ईशानी को इग्नोर करते हुए गुस्से से बोलता है,,,,,,, गिरने से बचाने का मतलब ये नहीं होता है कि गले ही पड़ जाओ.....!! ये सुनते ही ईशानी अपनी सेंसेज में आती है और सॉरी .....!!आई मीन थैंक यू बोलकर जैसे ही अपनी स्लीपर उठाने के लिए घूमती है तो आहान ईशानी को कमर से पकड़ कर अपनी तरफ खींच लेता है ईशानी की पीठ आहान के सीने से जाकर लगती हैं और घबराहट में ईशानी की आंखें बड़ी-बड़ी हो जाती है .....!! दिल पूरी तरह से धड़क उठता है और अजीब सी बेचैनी और घबराहट महसूस होने लगती है थोड़ी देर पहले ईशानी जिस आहान को देखकर उसकी आंखों में खुशी भारी चमक आ गई थी अहान की हरकत पर अब उसे घबराहट होने लगती है आंखों के आगे सोहम, वो रात, वह कैमरा और उसमें घटी घटना तेजी से ईशानी की आंखों के आगे घूम जाती है.....!!

ईशानी आहान से खुद को छुड़ाने के लिए बुरी तरह से कसमसाती है तो आहान ईशानी की कमर पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए ईशानी के दुपट्टे में उलझे अपने ब्रेसलेट को निकालते हुए बेहद गुरुर भरी मुस्कुराहट के साथ बोलता है,,,,,, तुम्हें जाने नहीं दे रहा हूं तो किसी गलतफहमी का शिकार मत हो जाना....!!इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि तुम पर लट्टू हो गया हूं.....!! शांति के साथ सीधी खड़ी रहो, मेरा ब्रेसलेट तुम्हारे दुपट्टे में उलझ गया है....!! उसे ही निकाल रहा हूं .....!जाने भी देता इस ब्रेसलेट को अगर तुमने मेरे करीब आने के लिए ये गिरने की चीप हरकत नहीं की होती ! तुम्हारे इन हथकंडो में कम से कम मैं तो फंसने वाला  नहीं हूं ....!!मुझसे करीबी बढ़ाने के लिए अक्सर आए दिन लड़कियां इस तरह की हरकतें करती है....!! ये ब्रेसलेट मेरे लिए ज्यादा कीमती नहीं है लेकिन तुम जैसी चीप लड़की इतनी एक्सपेंसिव चीज डिजर्व नहीं करती .....!! तुम्हारी जगह अगर कोई इसे भीख में आकर मांगती ना तो एक पल में उसे दे देता क्योंकि वो भीख अपनी मजबूरी के चलते मांग रही होती! तुम्हारी तरह अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट एक तरफ रख कर अमीर लड़कों के गले नहीं पड़ रही होती ....!!इतना बोलकर आहान झटके से ईशानी को खुद से दूर धकेलते हुए लिफ्ट की तरफ बढ़ जाता है.....!! बिना ये देखे कि आहान के धक्के से ईशानी भरभरा कर फर्श पर गिर जाती है......!!

           

ईशानी की कोहनी जमीन से टकराती है और ईशानी के होठों से एक दर्द भरी आह निकलने के लिए बेताब हो जाती है लेकिन वो पहले ही इतना कुछ सह चुकी थी कि उस दर्द को खुद में ही जज्ब कर लेती है और अपने होठों को भींच कर उस दर्द भरी आह को होठों पर आने नहीं देती लेकिन हां दर्द तो बहुत तेज हुआ था। गिरकर चोट खाने से नहीं बल्कि ये सोचकर कि वो चाहे कहीं भी चली जाए उसे गलत समझ कर दुत्कार दिए जाने वाली उसकी किस्मत नहीं बदलने वाली और यही एक विचार ईशानी के दिल में एक टच जगाती है और यही टीस ईशानी की आंख से एक आंसू  का रूप इख्तियार करके उसके गाल पर लुढ़क आता है...!!

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