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Chapter 30

हां इश्क़ है मुझे भी - Chapter 30

पंडित जी आगे बढ़कर ईशानी के आंसू पोंछ कर उसे गले लगाते हुए बोलते हैं,,,,,,, परेशान मत हो बेटा ईश्वर के यहां देर है अंधेर नहीं है!

पता है सोना और हीरा दोनों ही अपने आप में कीमती है लेकिन इनकी कीमत तब ज्यादा बढ़ जाती है जब सोने को पिंघला कर उसे एक खूबसूरत गहने में ढाला जाता है....!!और हीरे को तराशा जाता है....!! उसी तरह ईश्वर भी नेक बंदो की परीक्षाएं ज्यादा लेता है ! जब हम उसकी परीक्षाओं से घबरा कर अपनी परेशानियों से परेशान होकर ये बोलते हैं कि पता नहीं ऊपर वाले को भी हमसे क्या परेशानी है तो ऐसा सोचना हमारी बेवकूफी होती है! ऊपर वाले को हमसे कोई परेशानी नहीं होती असल में वो तब हमारी शख्सियत को तराश रहा होता है ताकि जब वो चमके तो हमारे चरित्र की चमक के आगे सब धुंधला जाये.....!!

अगर आज तुम वो हीरे नहीं लौटाती तो बड़ी आसानी से उनकी मदद से ना सिर्फ अपना सपना पूरा कर लेती बल्कि एक झटके में खुद की लाइफ भी बदल लेती लेकिन तुमने ऐसा ना करके ये साबित कर दिया कि तुम खुद अपने आप में एक हीरा हो सोने का मन है तुम्हारा....!! गलत करने वाला कुछ समय के लिए खुश हो लेता है लेकिन हर मुश्किल में भी सही रास्ते जाने वाले इंसान की जिंदगी बेशक संघर्ष से भरी हो बेशक पता नहीं चलता लेकिन खुद ईश्वर उसके लिए रास्ते बना रहा होता है....!! और ये बात मैं ऐसे ही हवा में नहीं बोल रहा हूं या यूं ही  उपदेश नहीं दे रहा हूं !पिछले 50 साल से इस मंदिर में हूं न जाने कितने धर्म परायण और अधर्मियों से पाला पड़ा है अपने कुकृत्यों पर फूट-फूट कर रोते हुए पछताते हुए ना जाने कितनों को देखा है। और उसी आधार पर बोल रहा हूं देखना

एक दिन तुम्हारे सपने भी पूरे होंगे

और अपने भी मिलेंगे

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