हां इश्क़ है मुझे भी - Chapter 43
ईशानी अपनी बुक और बाॅटल किचन के प्लेटफार्म पर एक साइड रखकर किचन में अपनी नज़रें इधर-उधर दौड़ाती है ताकि कुछ ऐसा मिल जाए जिसे वो हथियार की तरह इस्तेमाल कर सके ....!! फोन कमरे में ही छूट गया था जो गार्डस को इन्फॉर्म कर देती...!! हालांकि हाल में भी लैंडलाइन थी लेकिन फोन जिस कोने में रखा था वहां इतनी रोशनी नहीं थी कि वो डायरी में से गार्ड का नंबर पढ़ कर फोन मिल सके अब जो करना था ईशानी को ही करना था क्योंकि जरा सी आहट उस चोर को चौकन्ना और दादी मां की जान को खतरे में डाल सकती थी.....!!
ईशानी जल्दी से दौड़कर किचन मैं रखें बर्तन जैसे कभी कढ़ाई और भिगोना उठा कर देखती है तो कभी पोनी कभी पलटा और कभी चमचा उठाती है .....!! फिर आखिर में पोनी ही उठा लेती है क्योंकि उसका हैंडल थोड़ा बड़ा था ...!! दो कदम तेजी से आगे बढ़ती है फिर घूम कर मसाल दानी से मिर्ची वाली कटोरी उठा लेती है.....!!
तेजी से किचन के दरवाजे के करीब पहुंचती है तो नजरे सीढ़ियों की तरफ जाती हैं तो वह शख्स ऊपर कॉरिडोर में सरस्वती जी के रूम की तरफ ही जा रहा होता है चोर को सरस्वती जी के रूम की तरफ जाते देख ईशानी घबरा जाती है और हड़बड़ाहट में उसका हाथ वही कॉर्नर में प्लेटफार्म पर टिकाई हुई पानी की बोतल में लग जाता है और बोतल जोकि स्टील की थी गिर जाती हैं....!! रात के सन्नाटे में बोतल की आवाज दूर तक गूंजती है तो जाहिर सी बात है उस चोर के कान में भी पड़ती है! बोतल की आवाज सुनते ही वो शख्स तेजी से घूमता है और कुछ पल शांति से खड़ा रहता है शायद से जाने की कोशिश कर रहा था कि आवाज किधर से आई .....!! फिर वह शख्स तेजी से सीढ़ियों की तरफ वापस बढ़ता है और लगभग एक-एक बार में एक-एक दो-दो सीढ़ी टापते हुए नीचे उतरने लगता है.....!!
वही बोतल गिरने पर जहां ईशानी जो पहले से ही घबराई हुई थी घबराकर अपना मुंह खोल उस इंसान को सीढ़ियों से तेजी से उतरते हुए देखती रहती है और अब तक वो बंदा आधे से ज्यादा सीढ़ियां उतर चुका था तब जाकर ईशानी को होश आता है कि उसे कहीं छुपना होगा.....!! उसे चोर की शारीरिक संरचना को देखकर ईशानी का गला सूखने लगता है....!! काफी बलिष्ट शरीर का मालिक लग रहा था ....!!सामने से ईशानी उसका मुकाबला नहीं कर सकती थी इसलिए उस पर छुप कर ही वार करना होगा और क्योंकि सामने से तो वो हर हाल में उस चोर से मात ही खाएगी....!! ये ख्याल आते ही ईशनी तुरंत किचन में इधर-उधर नजर डालकर अपने छुपने के लिए जगह तलाशती है और केंद्र में बने प्लेटफार्म जिस पर कि गैस का चूल्हा रखा था उसके नीचे काफी बड़ा कैबिनेट बना हुआ था तो ईशानी उस कैबिनेट में घुस जाती है.....!!
2 मिनट बाद ही भारी-भारी कदमों की आहट किचन में सुनाई देती है वह शख्स जो भी था जैसे ही किचन में कुछ कदम आगे बढ़ता है तो नीचे पड़ी बोतल उसके पैर से टकराती है और लुढ़कते हुए किचन के केंद्र में बने प्लेटफार्म के पास पहुंचती है.....!!
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