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Chapter 37

हां इश्क़ है मुझे भी - Chapter 37

इस तरह आयुष ने उस पूरी 8 मंजिला इमारत की चेकिंग करने का आइडिया धीरे से पुलिस और बम निरोधक दस्ते के कानों तक पहुंचा दिया था तो अब पुलिस सिर्फ दो मंजिलों की नहीं पूरी की पूरी बिल्डिंग की तलाशी लेने का फरमान जारी करती है। जिसमें 2 घंटे जाने वाले थे.....!! मतलब आयुष ने खुद को सरस्वती जी के प्रकोप से बचा लिया था।

अब जबकि इतना समय लगने वाला था और क्योंकि आहान के पास इतना समय नहीं था तो आहान तुरंत मीटिंग एक होटल में अरेंज करवाता है लेकिन इस सब में जो एक घंटा घर जाने के लिए निकालने वाला था वो नहीं निकल पाता....!! यहां पर भी आयुष ने बड़े स्मार्टली घर से बहुत दूर और एयरपोर्ट के काफी नजदीक होटल में मीटिंग अरेंज करवाई थी क्योंकि ये जिम्मेदारी उसने खुद से आगे बढ़कर अपने कंधों पर ली थी और उसे ऐसा करते देख अहान उसे ये जिम्मेदारी खुश होकर दे भी देता है क्योंकि कहीं ना कहीं आहान को लग रहा था कि आयुष थोड़ा ही सही काम में इंटरेस्ट ले तो रहा है....!! इस बात से अनजान की आयुष का इंटरेस्ट कहाँ जुड़ा हुआ है

मीटिंग खत्म होने के बाद आहान और आयुष के सूटकेस भी पैक होकर होटल पहुंच गए थे ये देखकर आहान बेशक कहता कुछ नहीं है लेकिन आयुष से वाकई इंप्रेस हो गया था....!!

सरस्वती जी का प्लान कामयाब हो गया था और आहान को मीटिंग के बाद ही होटल से सीधे एयरपोर्ट के लिए निकालना पड़ता है।

इधर ईशानी सरस्वती मेंशन में शिफ्ट हो गई थी सरस्वती जी ने बड़े ही स्मार्टनेस के साथ दो नर्स अरेंज की थी ! जहां दूसरी नर्स की ड्यूटी सुबह 8:00 से शाम 5:00 बजे तक थी वही ईशानी की ड्यूटी शाम 4:00 से सुबह 8:00 बजे तक थी ....!! क्योंकि ईशनी की क्लासेज शाम के 4:00 बजे तक चलती थी और ईशानी शाम 4:30 बजे तक कॉलेज से घर  आ जाती थी....!!इस तरह ईशानी को एक छत मिल गई थी हालांकि पंडित जी के घर में भी ईशानी को कोई प्रॉब्लम नहीं थी लेकिन ईशानी जैसी खुद्दार लड़की को कहीं ना कहीं जोर जरूर पड़ रहा था क्योंकि जो काम ईशानी पंडित जी के लिए कर रही थी वो तो उनकी बेटी पूजा भी कर देती थी पंडित जी ने तो ईशानी को सिर्फ इसलिए वो सब करने की परमिशन दी थी ताकि ईशानी पर जोर ना पड़े और कहीं ना कहीं ईशानी भी इस बात को समझ रही थी ये बात पंडित जी को भी समझ आ रही थी...!! मंदिर के कामों में मदद से ईशानी के सिर पर छत और पेट भरने के लिए भोजन का इंतजाम हो गया था लेकिन अब मेडिकल की पढ़ाई के लिए फीस बेशक फ्री थी लेकिन कुछ एक्सपेंस फिर भी स्टूडेंट को उठाने पड़ते हैं! अगर पूरी तरह सब कुछ फ्री कर दिया जाता तो ईशानी को डाउट होने का डर था ! उन खर्चा लिए कुछ पैसों का अरेंजमेंट होना जरूरी था और वो अरेंजमेंट सरस्वती जी की देखभाल करके ही हो सकता था इसलिए पंडित जी ने ईशानी पर दबाव नहीं डाला और खुशी-खुशी ईशानी को सरस्वती जी के यहां शिफ्ट हो जाने दिया हालांकि संडे में ईशानी उनसे मिलने जरूर आएगी, ईशानी से ऐसा प्रॉमिस लेकर उसे विदा किया था!

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