Wife With Benefits - Chapter 49
मेरा पति पागलों की तरह मुझ पर टूट पड़ा था। मैं भी अपना संयम खो चुकी थी और उसे रोक नहीं पा रही थी। उसने मेरे होंठों और मेरे सीने को पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया था। वह काफी देर तक मेरे सीने को पकड़कर मुझे चूमता रहा।
फिर वह अलग हुआ और बोला, “क्या तुम पूरी तरह सच कह रही हो? तुम्हारा आशीष के साथ कोई रिश्ता नहीं है?”
मैंने कांपते हुए शब्दों में जवाब दिया, “मैं भला झूठ क्यों बोलूंगी? मेरे पास झूठ बोलने की कोई वजह नहीं है।”
उसने मेरी ड्रेस को कंधों से पकड़ा और एक झटके में नीचे खींच दिया। इससे मेरी ड्रेस का ऊपरी हिस्सा मेरी कमर तक सरक गया। वह अपनी बड़ी-बड़ी आंखों से फिर से मेरे सीने को देखने लगा।
वह बोला, “मुझे कितना वक्त हो गया है, मैंने इन्हें ठीक से देखा नहीं।”
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